आज हम एआई तकनीक के बारे में बात कर रहे हैं। इस डिजिटल युग में देखा जाए तो एआई तकनीक से हमारे लेखन पर काफी प्रभाव पड़ा है क्योंकि हम किसी भी बारे में अच्छा लेख लिखते हैं तो उसके लिए हमें काफी अध्ययन की जरूरत होती है, मनन करना पड़ता है और उसके साथ अभ्यास की भी आवश्यकता होती है तभी वो एक अच्छा लेख माना जाता है और वहीं एआई की वजह से कुछ सेकंड में ही हमें तैयार सामग्री मिलती है, बेशक इससे लेखनी आसान तो हुई लेकिन हमारा ध्यान उसके दुष्परिणामों की तरफ नहीं गया, जो हमें बाद में नजर आने लगते हैं। एआई की वजह से हमें बिना मेहनत के ही जब तैयार सामग्री मिलेगी तो क्यों हम पढ़ने और सोचने पर समय बर्बाद करेंगे। यही कारण है कि लोगों में पढ़ने और स्वयं सोचने की आदत कम होती जा रही है। कभी सोचा है, इससे लेखनी की रचनात्मकता कितनी प्रभावित होती है, क्योंकि हम अपने विचारों, एहसासों और भावनाओं को उसमें नहीं पिरो पाते। लेखन केवल शब्दों का संजोना ही नहीं, उसे अपने एहसासों को उकेरना पड़ता है, यह काम एक मशीन तो नहीं समझ सकती। हम एआई तकनीक को पूरी तरह से नकार भी नहीं सकते क्योंकि इसका सकारात्मक पक्ष भी है। इससे हम अपनी भाषा सुधारने में मदद ले सकते हैं और यह शोध कार्य को भी तेज करता है और नए लेखकों को भी काफी मदद मिलती है। कोशिश करें की हम इसका अधिक प्रयोग ना करें क्योंकि इससे हमारी मौलिक सोच कमजोर हो जाती है। अच्छा हो अगर हम एआई को एक सहायक के रूप में प्रयोग में लें ना कि उस पर पूरी तरह से आश्रित हो जाएं। इसलिए हमें संतुलन बनाए रखना होगा तभी हम लेखन की वास्तविक कला को जीवित रख पाएंगे और अपने लेखन प्रक्रिया पर प्रभाव भी ना पड़नें दें।
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