दौसा (गोवर्धन लाल वर्मा): "स्मार्ट सिटी" और "सौंदर्यीकरण" के दावे करने वाली सरकार के राज में दौसा शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है। शहर की रामकुंड कॉलोनी से बाबा जी की छावनी तक जाने वाले रास्ते की हालत देखकर लगता है जैसे नगर परिषद ने इस इलाके को भगवान के भरोसे छोड़ दिया हो। इस के अलावा सैंथल मोड़ से थोड़ा आगे दुर्गा मंदिर के पास में स्थित कॉलोनी जो जयपुर आगरा नेशनल हाईवे के टच में है, इस रास्ते में नाले कचरे से भरे पड़े है। ऐसा लगता है जैसे नाला जब बना तब से एक बार भी सफाई नही हुई हो। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां का नाला जब से बना है तब से बंद पड़ा है, सालों से एक बार भी सफाई नहीं हुई। नतीजा ये कि पूरा नाला कचरे और गंदे पानी से आर-पार भरा हुआ है। बरसात में ये गंदगी सड़क पर बहकर आ जाती है और बीमारी का घर बन गई है। तस्वीर में आप देख सकते है कि सड़क के दोनों तरफ प्लास्टिक, पन्नी, गंदगी और कीचड़ का अंबार लगा है। गंदगी का स्थानीय व्यक्ति ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, लोगो ने गुस्से में कहा कि नगर परिषद के रोज चक्कर लगते हैं लेकिन कोई काम नहीं होता।
*"पार्षद के घर के पास ही गंदगी का ढेर"*
सबसे शर्मनाक बात ये है कि जिस रास्ते पर ये कचरा पड़ा है, वो एक जनप्रतिनिधि के घर के पास से होकर गुजरता है। स्थानीय का आरोप है कि पार्षद जहां रहते हैं, वहीं गंदगी का ढेर है। उन्हें खुद शर्म नहीं आती।
*जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप*
लोगों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। लोगों का आरोप कि यहां के सांसद, विधायक, पार्षद सब बिके हुए पड़े हैं। मुद्दा ही नहीं उठाते। दौसा को "पांच महादेव की देव नगरी" कहा जाता है लेकिन देव नगरी में अगर चारों तरफ नजर घुमाएं तो कचरा और गंदगी होगी तो श्रद्धालु क्या सोचकर आएंगे।
*बीमारी का खतरा, प्रशासन सो रहा*
गंदगी के कारण मच्छर, बदबू और संक्रामक रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं लेकिन नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सभी कुंभकर्णी नींद में हैं।
*लोगों की मांग*
स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर और नगर परिषद आयुक्त से मांग की है कि 7 दिन के भीतर पूरे क्षेत्र की सफाई करवाकर नाले की स्थाई सफाई व्यवस्था की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे कचरा लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। अब सवाल ये है कि "विकसित दौसा" का सपना दिखाने वाले कब धरातल पर उतरेंगे या फिर किसी महामारी के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी।