श्री भुज तपागच्छ संघ में भव्य चातुर्मास प्रवेश, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): श्री भुज तपागच्छ जैन संघ में बुधवार को "गुणरत्नाकर आध्यात्मिक गुणवर्धक चातुर्मास" का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और धर्ममय वातावरण के बीच हुआ। परम पूज्य श्रमणी गणनायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरिश्वरजी महाराज के सान्निध्य में पंन्यास श्री जीतरत्न विजयजी, पंन्यास श्री सौम्यांगरत्न विजयजी सहित 16 साधु भगवंत तथा गुरुमैया प्रवर्तिनी साध्वी श्री पुण्यरेखाश्रीजी के नेतृत्व में 20 साध्वी भगवंतों का चातुर्मास प्रवेश समारोह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ। प्रातः दादावाड़ी से निकली शोभायात्रा में बहनों एवं कन्याओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर भाग लिया। प्रभु एवं गुरु परंपरा के रथ, ढोल-शहनाई, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ शोभायात्रा भुज के प्रमुख मार्गों से होती हुई वाणियावाड़ पहुंची, जहां स्वस्तिक, गहुंली और अक्षत से आचार्यश्री का भावपूर्ण स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने "पधारो सूरिराज, जिन शासन सिरताज" के जयघोष से वातावरण को धर्ममय बना दिया। दीप प्रज्वलन के पश्चात अपने प्रेरक प्रवचन में जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरिश्वरजी महाराज ने कहा कि "चातुर्मास आत्मा का चार महीने चलने वाला मेडिकल कैंप है। इसमें क्रोध रूपी कैंसर, मान रूपी मलेरिया तथा माया-लोभ रूपी ल्यूकेमिया का आध्यात्मिक उपचार होता है। तप, जप और नियम से सिद्धि तप की वैक्सीन तैयार कर कर्म रूपी कोरोना से स्वयं को सुरक्षित रखना है।" उन्होंने "घर-घर सिद्धि तप, हर-घर सिद्धि तप, अबकी बार चार सौ के पार" का आह्वान करते हुए अधिकाधिक श्रद्धालुओं से सिद्धि तप से जुड़कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पूज्य आत्मदर्शनसूरिजी ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में गुरु पूजन का लाभ संघवी सुखीबेन बाबूलाल सुखधाम परिवार तथा कामली ओढ़ाने का लाभ सुशीलाबेन एवं दर्शनाबेन राजहंस परिवार को प्राप्त हुआ। अंत में तपागच्छ संघ के अध्यक्ष श्री कीर्तिभाई एवं ट्रस्टी मंडल ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया संयोजक श्री नीलेशभाई ने दी।

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