स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोमासर में एफएसटी प्लांट निर्माण को लेकर विरोध, ग्रामीणों ने जगह बदलने की उठाई मांग

AYUSH ANTIMA
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श्रीडूंगरगढ़/बीकानेर (मुकेश रामावत): सरकार की स्वच्छ भारत योजना के अंतर्गत राजस्व गांवों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एफएसटी प्लांट लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सबसे पहला प्लांट क्षेत्र के सबसे बड़े गांव मोमासर में प्रस्तावित है, लेकिन इसके चयनित स्थान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। गुरुवार को पंचायत समिति विकास अधिकारी मनोज कुमार धायल निर्माण कार्य का निरीक्षण करने मोमासर पहुंचे। इस दौरान पूर्व जिला परिषद सदस्य सुभाष कमलिया, पूर्व सरपंच जेठाराम भामू, सुशील राजपुरोहित, खींयाराम भामू, सुंदरलाल भार्गव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी वहां एकत्रित हुए और अपना विरोध दर्ज करवाया। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट के लिए चुनी गई जगह गांव की घनी आबादी और सार्वजनिक क्षेत्र के पास है। इसी स्थान पर सावन-तीज का मेला लगता है, साथ ही पास में बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय और कालका मंदिर भी स्थित है। ग्रामीणों ने मांग की कि इस प्लांट को गांव से दूर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए। विकास अधिकारी मनोज धायल ने बताया कि प्लांट के लिए कार्य स्वीकृत हो चुका है और बजट भी पास हो गया है। नींव के पीलर भर दिए गए हैं और निर्माण कार्य प्रगति पर है। एफएसटी का मतलब है फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट। शहरों की तर्ज पर अब गांवों में भी सीवरेज सिस्टम के विकल्प के तौर पर इसे लगाया जा रहा है। इसके जरिए घरों के सेप्टिक टैंकों का मल-मूत्र एकत्र कर उसका उपचार किया जाएगा। उपचार के बाद निकलने वाले पानी को शुद्ध कर सिंचाई या पशुओं के लिए उपयोग में लाया जाएगा, जबकि बची हुई खाद का इस्तेमाल जैविक खेती में होगा। इससे गांवों में स्वच्छता के साथ-साथ जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

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