कोटपूतली (ईशाक खान): राइट टू एजुकेशन (आरटीई) पुनर्भरण की करोड़ों रुपयों की बकाया राशि, प्री-प्राईमरी कक्षाओं के भुगतान में लंबी देरी और शिक्षा विभाग द्वारा लगातार की जा रही जांच कार्यवाहियों के विरोध में जिले के निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कोटपूतली निजी शिक्षण संस्था वेलफेयर समिति के आह्वान पर बुधवार 15 जुलाई को क्षेत्र के सभी आरबीएसई व सीबीएसई से संबद्ध निजी विद्यालयों में एक दिवसीय पूर्ण बंद (तालाबंदी) रखी गई। इस बड़े आंदोलन के कारण हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई। स्कूल संचालकों ने विशाल प्रदर्शन करते हुए जिला कलक्टर अपर्णा गुप्ता को अपनी 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। निजी स्कूल शिक्षण संस्था के अध्यक्ष रतन लाल सैनी व सचिव दुर्गा प्रसाद मिश्रा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से लंबित आरटीई भुगतान ने प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों को गंभीर आर्थिक संकट में धकेल दिया है, जिससे कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। संचालकों का आरोप है कि सत्र 2021-22 से कई स्कूलों का पुनर्भरण अटका हुआ है, जबकि सत्र 2025-26 की राशि भी अभी तक जारी नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त विभाग पोर्टल पर तकनीकी ’मिसमैच’ का बहाना बनाकर भुगतान रोक रहा है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया है।
*कोटपूतली निजी शिक्षण संस्था वेलफेयर समिति की 10 प्रमुख मांगें*
पिछले सत्रों के सभी लंबित बिलों का एक साथ एकमुश्त भुगतान किया जानें, शैक्षणिक सत्र समाप्त होने से पहले आरटीई की दोनों किष्तों का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जानें, महंगाई के अनुसार आरटीई यूनिट कॉस्ट को बढ़ाकर 20 से 25 हजार रुपये किया जायें, छात्रों की पाठ्य पुस्तकों की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जायें, पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का भुगतान पूर्व के सत्रों से नियमानुसार किया जानें, पोर्टल पर होने वाले दोहरे नामांकन की समस्या का स्थाई अंत हो, शाला संबलन एप के 44 बिंदुओं वाले कड़े निरीक्षण को रद्द किया जायें और भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र की वैधता सीमा बढ़ाकर कम से कम 05 वर्ष की जायें, बिना नोड्यूज (बकाया राशि क्लियर किए) के किसी भी छात्र की टीसी जारी ना करने का नियम सख्ती से लागू हो, पोर्टल पर आने वाली सभी तकनीकी दिक्कतों का समाधान शिक्षा विभाग अपने स्तर पर करें, सरकारी स्कूल के छात्रों की तरह निजी स्कूलों के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी छात्रवृत्ति, लैपटॉप और साईकिल जैसी सरकारी सुविधाएं दी जायें।
*प्रशासन का पक्ष, नियमों का पालन जरूरी*
इस पूरे विरोध प्रदर्शन और तालाबंदी पर जिला शिक्षा अधिकारी मनोरमा यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य किसी भी शिक्षण संस्था को परेशान करना नहीं है। विभाग का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही लाना है। जिन स्कूलों के दस्तावेजों, रिकॉर्ड या यू-डाईस पोर्टल में कमियां पाई जा रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार ही कार्यवाही की जा रही है। सभी निजी विद्यालयों को सरकारी गाईडलाईन और नियमों का पूर्ण पालन करना होगा।