बीकानेर में कारगिल विजय दिवस पर शौर्य को सलाम: शहीद स्मारक पर उमड़ा जनसैलाब, घायल योद्धा कुलदीप गौतम ने सुनाए युद्ध के अनुभव

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): देश की आन-बान और शान के प्रतीक कारगिल विजय दिवस के 26वें अवसर पर शनिवार को बीकानेर शहीद स्मारक पर देशभक्ति और शौर्य का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भारतीय सेना के वर्तमान जवानों और पूर्व सैनिकों ने एक साथ मिलकर इस दिन को "शौर्य दिवस" के रूप में मनाया और कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्मारक परिसर तिरंगे और देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सेवारत सैनिक, भूतपूर्व सैनिक, शहीदों के परिजन और आम नागरिक शामिल हुए।  

*घायल योद्धा ने सुनाई कारगिल की गाथा*  

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आया जब कारगिल युद्ध के रिटायर हवलदार कुलदीप गौतम ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय सेना ने अदम्य साहस, रणनीति और वीरता के साथ ऊंची चोटियों पर बैठे दुश्मन को धूल चटाई थी।  
हवलदार गौतम ने कहा कि भारतीय सेना ने बहादुरी से लड़ते हुए दुश्मन देश की सेना के दांत खट्टे कर दिए और उनके नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि इस युद्ध में वे खुद भी देश के लिए लड़ते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को गर्व और देशभक्ति से भर दिया।  

*शहीदों को नमन, देश रक्षा का संकल्प दोहराया*
 
श्रद्धांजलि सभा के दौरान सभी उपस्थित जवानों और नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को नमन किया और पुष्प अर्पित किए।  
इस मौके पर सेना के जवानों ने एक स्वर में कहा कि आज भी हम उसी जोश, जज्बे और समर्पण के साथ देश की सरहदों की रक्षा के लिए तैयार हैं। दुश्मन की किसी भी साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हम हर समय तैयार हैं। कार्यक्रम के अंत में "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम" के उद्घोष के साथ माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया। शहीद स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कारगिल के शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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