रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): पूज्यपाद 500 श्रमणी गणनायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा में श्री माधापर जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा पहली बार शास्त्रीय सामायिक का भव्य आयोजन किया गया। श्री सुविधिनाथ जिनालय से ढोल-शहनाई और गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक शास्त्रीय सामायिक में भाग लेकर धर्म आराधना की। इस अवसर पर आचार्यश्री ने 'जिनशासन वंदना गीत' का गान कर जैन धर्म की वैज्ञानिकता एवं आध्यात्मिक महत्ता का प्रभावी निरूपण किया। उन्होंने विश्व शांति की कामना के साथ पांच मुद्राओं में नवकार महामंत्र का जाप करवाया। कार्यक्रम के दौरान 110 रुपये की प्रभावना भी की गई। इसके बाद वर्धमान नगर रोड स्थित श्री कच्छ माधापर लेउवा पटेल ज्ञाति मंडल संचालित श्री रामजी प्रेमजी गोरसिया इंग्लिश हाई स्कूल में जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी ने पहले अंग्रेजी और फिर गुजराती भाषा में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "माता-पिता आपको विरासत में कार दें या न दें, लेकिन संस्कार अवश्य दें। विनय, विवेक और सदाचार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।" उनके प्रेरक उद्बोधन से प्रभावित होकर विद्यार्थियों ने उत्तम संस्कारों को अपनाने का संकल्प लिया। विद्यालय के ट्रस्ट मंडल एवं शिक्षकगण ने आचार्यश्री का आभार व्यक्त किया। श्री माधापर जैन संघ के अध्यक्ष अश्विनभाई ने बताया कि पूज्य गुरुदेव शुक्रवार को माधापर से विहार कर वर्धमान नगर पहुंचेंगे, जहां धर्मसभा एवं प्रवचन का आयोजन होगा। शनिवार प्रातः 8 से 10 बजे तक शास्त्रीय सामायिक आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि आचार्यश्री विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में प्रवचन देकर 'संस्कारी भारत नवनिर्माण' अभियान को गति दे रहे हैं, जिसे समाज के सभी वर्गों से व्यापक समर्थन और सराहना प्राप्त हो रही है।
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