ईसरदा बंथ बारैठा नहर परियोजना को लेकर किसानों ने एसडीएम को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन

AYUSH ANTIMA
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सूरौठ/करौली (प्रमोद तिवाड़ी): ईसरदा बंथ बारैठा फीडर नहर परियोजना की सामाजिक प्रभाव आंकलन (एसआईए) रिपोर्ट के लिए शुक्रवार को सूरौठ तहसील परिसर में हिंडौन एसडीएम एवं भूमि अवाप्ति अधिकारी हेमराज गुर्जर ने जनसुनवाई की। नहर परियोजना से प्रभावित गांवों के किसानों ने एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की। इस अवसर पर सूरौठ तहसीलदार अशोक कुमार भी विशेष रूप से मौजूद रहे। चौबीसा जाट समाज के महामंत्री तेज सिंह डागुर ने बताया कि ज्ञापन में मांग की गई कि नहर का सर्वे एवं निर्माण पहाड़ों की तलहटी, सरकारी चारागाह, सिवाय चक अथवा अन्य उपलब्ध सरकारी भूमि से किया जाए, ताकि किसानों की उपजाऊ भूमि सुरक्षित रह सके। यदि किसी कारणवश निजी भूमि का अधिग्रहण करना आवश्यक हो, तो प्रभावित प्रत्येक किसान परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए। ज्ञापन में किसानों ने माग रखी कि अधिग्रहित भूमि का कम से कम 10 गुना मुआवजा दिया जाए तथा किसानों को खेती योग्य वैकल्पिक सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पुनर्वास, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की लिखित गारंटी देने की भी मांग की गई। किसानों ने कहा कि जितनी भूमि अधिग्रहित की जाए, उतनी ही सरकारी भूमि आवंटित की जाए तथा किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और पुनर्वास की लिखित गारंटी दी जाए। किसानों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण होने से उनकी आजीविका और कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर जाट समाज चौबीसा के महामंत्री तेज सिंह डागुर, रिंकू खेड़ी हैवत, विष्णु डांगुर, नंदराम, रामवीर, भगीरथ, धर्मेंद्र डागुर, प्रकाश, मोनू, सोहन सिंह, हजारी पटेल, महेंद्र, प्रकाश चंद्र सहित चिनायटा, खेड़ी हैवत, नागल दुर्गसी, सौंमली, सौंमला, जटवाड़ा, रारा शाहपुर, हाडौली एवं सूरौठ तहसील के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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