बीकानेर (मुकेश रामावत): जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल पीबीएम एक बार फिर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। ओपीडी के समय में भी कई विभागों में सीनियर डॉक्टरों की कुर्सियां खाली मिलीं, जिससे इलाज कराने पहुंचे मरीजों को घंटों भटकना पड़ा।
*डॉक्टरों के चैंबर बंद, जूनियर स्टाफ संभाल रहा मोर्चा*
बुधवार को अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि अधिकांश विभागों में ताले लटके थे। पर्ची और दवाओं के लिए जूनियर स्टाफ इधर-उधर दौड़ता नजर आया। मरीजों का कहना था कि "यहां इलाज कम और चक्कर ज्यादा लगवाए जाते हैं। ट्रॉमा सेंटर में भीड़ इतनी है कि गंभीर मरीजों को भी इंतजार करना पड़ रहा है।" लंबी कतारों के बीच बैठने की व्यवस्था न होने से बुजुर्ग और दूर-दराज से आए लोग सबसे ज्यादा परेशान दिखे।
*समय पर न आना, जल्दी चले जाना बना आम*
तीमारदारों ने आरोप लगाया कि कई डॉक्टर ड्यूटी पर देरी से आते हैं और तय समय से पहले निकल जाते हैं। इसका खामियाजा गरीब और ग्रामीण मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो सुबह से इलाज के लिए पहुंचते हैं।
*नियमित मॉनिटरिंग की मांग*
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में डॉक्टरों की हाजिरी और ड्यूटी पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि मरीजों को समय पर समुचित इलाज मिल सके। इस मामले में अस्पताल प्रशासन से उनका पक्ष भी मांगा गया है।