झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जूनोसिस जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत गुरुवार को एएनएम प्रशिक्षण केंद्र (ANMTC) में जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोसिस रोगों के प्रति आमजन एवं स्वास्थ्यकर्मियों को जागरूक करना तथा इनके प्रभावी नियंत्रण एवं बचाव के उपायों
की जानकारी देना था। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.छोटेलाल गुर्जर ने कहा कि जूनोसिस रोगों की रोकथाम के लिए चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ आमजन की जागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण, स्वच्छता का पालन तथा संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने से इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
डिप्टी सीएमएचओ डॉ.भंवर लाल सर्वा ने पशु जन्य रोग नियंत्रण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रेबीज, ब्रुसेलोसिस, एंथ्रेक्स सहित कई गंभीर बीमारियां पशुओं से मनुष्यों में फैल सकती हैं। उन्होंने इन रोगों के लक्षण, बचाव एवं समय पर उपचार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। पशुपालन विभाग के डॉ.यशपाल ने पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण तथा सुरक्षित पशुपालन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ.कुलदीप फौजदार ने रोगों की निगरानी, संक्रमण की रोकथाम एवं जनसहभागिता की भूमिका पर जानकारी दी। एएनएमटीसी की प्राचार्य संतोष सैनी ने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण जानकारी को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाकर जन-जागरूकता अभियान को सफल बनाएं। इस अवसर पर जूनोसिस रोगों से बचाव एवं नियंत्रण संबंधी संदेशों से युक्त जन-जागरूकता पोस्टर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने पशु जन्य रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।