कर्नाटक (श्रीराम इंदौरिया): आधुनिक हिंदी काव्य धारा-1 पुस्तक का लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन आभासी पटल पर गूगल मीट के माध्यम से सुंदर रूप से किया गया। किताब के संपादक डॉ.सुनील परीट (कर्नाटक) एवं सह-संपादक डॉ.बीजे पटेल 'ब्रिजेश' (गुजरात) ने संपादित पुस्तक आधुनिक हिंदी काव्य धारा-1 के जरिए भारत के विभिन्न राज्यों के 11 रचनाकारों को एक मंच पर लाकर उनकी साहित्यिक योग्यता को परखकर हिंदी साहित्य को एक अनमोल तोहफा दिया है। इस संग्रह के रचनाकार हैं -कृष्ण कुमार गुप्ता, डॉ.बीजे पटेल 'ब्रिजेश', गंगा प्रसाद यादव 'आत्रेय', डॉ.भारती वर्मा बौड़ाई, डॉ.विनय कुमार सिंघल 'निश्छल', डॉ.शारदा प्रसाद, चंद्र किशोर चौधरी, डॉ.सरला सिंह 'स्निग्धा', डॉ.सुरेंद्र लाल साहू 'निर्विकार', डॉ.अमीना पट्टेवाले (सौदागर) और डॉ.सुनील परिट। इस किताब का प्रकाशन एक अनोखा एवं स्तुत्य ज्ञानयज्ञ माना जाएगा। इस पुस्तक में विभिन्न विषयों पर आलेखित 90 कविताएँ समाविष्ट की गई हैं। इस किताब का आभासी लोकार्पण सभी रचनाकारों एवं आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति में किया गया।
सर्वप्रथम डॉ.सुनील परिट ने सभी रचनाकारों एवं अतिथियों का शब्दों से हार्दिक स्वागत किया। परिचर्चा के मुख्य बिंदु पर सामूहिक चर्चा करके कुछ सामूहिक निर्णय किए गए। पुस्तक की विशेषताएँ एवं विभिन्न विश्वविद्यालय में हिंदी अभ्यास समिति को पुस्तक पहुँचाने की सराहनीय बात डॉ.बीजे पटेल 'ब्रिजेश' ने सबके सामने रखी, साथ ही साथ पुस्तक का सेटअप एवं प्रूफ रीडिंग के अपने अनुभव सबसे साझा किया। प्रत्येक रचनाकार ने अपनी सहमति देते हुए इस बात को सराहा कि यदि किसी न किसी यूनिवर्सिटी के अभ्यासक्रम में यह पुस्तक शामिल की जाती है, तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। इस पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा में प्रत्येक रचनाकार को अपनी बात रखने का मौका मिला। कृष्ण कुमार गुप्ता ने आसपास के स्कूल और ग्रंथालयों में पुस्तक पहुँचाने की बात की। गंगा प्रसाद यादव 'आत्रेय' ने सुंदर कविता पाठ किया। डॉ.भारती वर्मा बौड़ाई एवं डॉ.विनय कुमार सिंघल 'निश्छल', दोनों अपनी सेहत के कारण इस लोकार्पण समारोह में उपस्थित नहीं रह पाए थे। उनके द्वारा भेजे गए शुभेच्छा-संदेश का पठन डॉ.बीजे पटेल 'ब्रिजेश' ने किया। डॉ.शारदा प्रसाद ने इस संग्रह के प्रूफ रीडिंग का अनुभव बताते हुए आसपास के शैक्षिक संस्थानों में यह पुस्तक पहुँचाने की बात रखी। चंद्र किशोर चौधरी ने इस संग्रह के साथ जुड़ने का अनुभव साझा करते हुए विभिन्न यूनिवर्सिटियों में किताब को पहुँचाने की बात का समर्थन किया। डॉ.सुरेंद्र लाल साहू 'निर्विकार' ने इन सभी बातों का समर्थन करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटियों में यह किताब संपादक एवं सह-संपादक की ओर से ही पहुँचाई जाए। उन्होंने "देश भक्ति" पर एक संग्रह निकालने की बात भी रखी, जो संभवतः 26 जनवरी 2027 के दिन पाठकों के हाथों में आ सकती है। डॉ.अमीना पट्टेवाले ने इस पुस्तक के साथ जुड़ने का आनंद प्रकट किया और अपनी रचनाएँ चयन की गई, उसकी खुशी जाहिर की। सभी रचनाकारों की बातों को स्वीकार करते हुए संपादक मंडल ने इस पुस्तक के प्रचार-प्रसार में समुचित कदम उठाने की बात दोहराई। कार्यक्रम के अंत में सबको डिजिटल प्रमाण पत्र दिए गए। इस तरह से यह साहित्यिक आभासी कार्यक्रम पूरे दो घंटे तक साहित्यिक चर्चा से सराबोर रहा। अंत में डॉ.सुनील परिट ने सबका आभार प्रकट किया और साहित्यिक कार्यक्रम को संपन्न किया गया।