झुंझुनूं में EWS जन जागृति मंच की जनसभा आयोजित

AYUSH ANTIMA
By -
0


झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण में लागू भूमि एवं भवन संबंधी पात्रता शर्तों को हटाने की मांग को लेकर रविवार को EWS जन जागृति मंच के तत्वावधान में जनसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम झुंझुनूं के रोड नंबर एक स्थित शार्दुल छात्रावास में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न समाजों के लोग शामिल हुए। जनसभा में राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री एवं मंच के संयोजक धर्मेंद्र सिंह राठौड़ सहित कई वक्ताओं ने EWS आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे और केंद्र सरकार से राजस्थान मॉडल लागू करने की मांग की। धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि EWS वर्ग, जिसे आर्थिक पिछड़ा वर्ग और अनारक्षित वर्ग भी कहा जाता है, लंबे समय तक आरक्षण से वंचित रहा। इस वर्ग की समस्याओं को लेकर पिछले 25-30 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में सबसे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और इस विषय पर कई स्तरों पर प्रयास हुए, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।उन्होंने कहा कि बाद में यूपीए सरकार के दौरान मेजर जनरल एस.आर. सिन्हो आयोग का गठन किया गया, जिसने वर्ष 2010 में अपनी रिपोर्ट दी। इसके बाद वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संविधान का 103वां संशोधन कर EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण लागू करते समय पांच ऐसी जटिल शर्तें जोड़ दी गईं, जिनसे बड़ी संख्या में पात्र लोग इसका लाभ लेने से वंचित रह गए। इनमें 8 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा, 5 एकड़ से कम भूमि, गांव में 200 वर्ग गज से कम आवासीय भूखंड, शहर में 100 वर्ग गज से कम भूखंड और 1000 वर्ग फीट से कम मकान या फ्लैट जैसी शर्तें शामिल हैं। धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि इन शर्तों के कारण EWS आरक्षण का उद्देश्य कमजोर पड़ गया। इसके बाद विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने परीक्षण के बाद 20 अक्टूबर 2019 को आय सीमा के अलावा बाकी सभी शर्तें समाप्त कर दीं। इससे EWS प्रमाण पत्र बनना आसान हुआ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलने लगा।उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने EWS वर्ग के छात्रों को अतिरिक्त सुविधाएं भी दीं। इसमें लड़कों को 5 वर्ष और लड़कियों को 10 वर्ष की आयु सीमा में छूट, EWS प्रमाण पत्र की वैधता अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष करना और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने राजस्थान मॉडल को सबसे बेहतर बताते हुए केंद्र सरकार से इसे पूरे देश में लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भी आय सीमा के अलावा अन्य शर्तें समाप्त कर दी हैं। धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि EWS जन जागृति मंच अब तक राजस्थान के 20 से अधिक जिलों में जनजागरण अभियान चला चुका है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो जयपुर में विशाल रैली और सत्याग्रह किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर जयपुर से दिल्ली कूच कर गांधीवादी तरीके से आंदोलन किया जाएगा। सभा में वक्ताओं ने कहा कि EWS वर्ग को आरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब जटिल पात्रता शर्तों को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, छात्र और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस मौके पर यशवर्धन सिंह शेखावत, राजेंद्र शर्मा, जगदीश खाजपुरिया, कर्नल शौकत समेत अन्य सभी समाजों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!