भगवान श्री कृष्ण का चरित्र सबके मन मे चलने वाली अबाध प्रक्रिया: पंडित तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेंद्र शर्मा झेरलीवाला): मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्रीराम का चरित्र हर युग में प्राणी मात्र के लिए आदर्श चरित्र है। जबकि भगवान श्री कृष्ण का चरित्र सबके मन मे चलने वाली अबाध प्रक्रिया है। भागवत मे जो कंस है, वह हमारे मनके अंदर बैठा अभिमान है। ज़ब अभिमान रूपी कंस मन पर अधिकार कर लेता है तो उसके अनुचर काम, क्रोध, मद, लोभ, मान, मोह, मतसर अपने आप आ जाते है। जिन्हे भागवत मे पूतना, कालिया, बकासुर, अघासूर आदि नाम से बताया गया है। उक्त आध्यात्मिक विवेचना वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेहिकलां के नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कृष्ण की बाल लीलाओ का वर्णन करते हुए व्यक्त की। कथा मे पूतना वध, कालिया दहन, बकासुर, अघासूर आदि देत्य वध तथा गोयर्धन धारण की लीला का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर कथा मे कृष्ण बाल लीला तथा गोवर्धन धारण की सजीव झांकी सजाई गयी। कथा के दौरान सुन्दर भजनों की मनोहारी प्रस्तुति ने सभी को आनंदित किया। कथा के प्रारंभ में यजमान विक्रम शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान डॉ.जगदीश प्रसाद शर्मा, पूर्व सरपंच शीशराम गोस्वामी, हजारी लाल शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, भागीरथ जांगीड, राकेश पुनिया, प्रवीण शर्मा, राजेंद्र सिंह शेखावत, मातुराम महरिया, संजय भगत, नत्थुराम शर्मा, जितेंद्र जांगीड, ब्रह्मानंद पुनिया, रतन लाल शर्मा, पवन शर्मा, योगेश जांगीड, निशांत जांगीड, अरविन्द शर्मा, संजय भगत, सीताराम शर्मा, अशोक शर्मा, संतोष सिंह शेखावत, ओमप्रकाश महरिया, विक्रम शर्मा, करन सिंह शेखावत, सत्यनारायण कुमावत, प्रमोद भगत, होशियारी लाल शर्मा, गजानंद शर्मा, अनिल शर्मा, धरम सिंह शेखावत, रवि कुमावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला, पुरुष मौजूद रहे।

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