नीट का पेपर लीक होने का दंश झेल रही एनटीए ने इस परीक्षा का दोबारा आयोजन किया। यह परीक्षा पेपर लीक होने के कारण बहुत चर्चित रही। दोबारा हुई परीक्षा मे करीब 22 लाख विधार्थियों से अधिक डाक्टर बनने की तमन्ना को लेकर परीक्षा में बैठे लेकिन अजमेर का एक स्कूल, जो इस परीक्षा को लेकर परीक्षा केन्द्र इस बात को लेकर चर्चा में रहा कि उस केन्द्र पर एक मुस्लिम महिला हिजाब पहनकर परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा देने पहुंची, जिस पर विवाद हो गया। बाद में नियमों का हवाला देकर उसको परीक्षा में बैठने दिया गया। हिजाब को लेकर बालिका के अभिभावकों का तर्क था कि हिजाब हमारी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, इसलिए महिलाएं बिना हिजाब घर से बाहर ही नहीं निकलती है तो यह हिजाब पहनकर ही परीक्षा देगी। अब इसी परीक्षा को लेकर दूसरे दृश्य पर गौर करें तो सनातन धर्म के धार्मिक मान्यताओं के प्रतीक जो किसी महिला की सुहाग के प्रतीको को लेकर दोहरा मापदंड देखने को मिला। हिंदु बालिकाओं व युवतियों के मंगल सूत्र, नाक की लौंग व कान की बालियों को कुछ परीक्षा केन्द्रों से उतरवाई गई। यहां तक लंबे बाजू का कुर्ता व सिर पर दुपट्टा रखने की भी इजाजत नहीं दी गई। मंगल सूत्र, नाक की लौंग व कान की बालियां क्या नकल करने में सहायक होते हैं, यदि नहीं तो सनातन धर्म के साथ ऐसा दोहरा व्यवहार आखिर क्यों।
हिजाब को लेकर सैद्धांतिक सवाल जो डाक्टरी पेशे से संबंधित है, चर्चा करना भी जरुरी हो जाता है। अब एक ज्वलंत प्रश्न है कि अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्या हिजाब पहनकर ही आपरेशन थियेटर में आपरेशन करेगी। मुस्लिम समुदाय की महिलाएं जो इस पेशे में है, उनको डयूटी के समय हिजाब पहने हुए नहीं देखा गया। अभिभावकों का यह तर्क कि हमारी महिलाएं बिना हिजाब के घर से बाहर ही नही निकलती तो उनको उसी हिसाब की परीक्षाओं की तैयारी करवानी चाहिए। एमबीबीएस व एमडी बनने के बाद बहुत ही जटिल आपरेशन करने किन परिस्थितियों में करने होते हैं, इससे शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा। यदि आपरेशन करते समय भी धार्मिक भावनाएं आहत होती है तो इस पेशे में आने का औचित्य समझ से बाहर है। हालांकि परीक्षा करवाने में बहुत ही सावधानी की जरूरत है क्योंकि पहले ही पेपर लीक का दाग़ एनपीए पर लगा हुआ है लेकिन उनको यह सोचना होगा कि मंगलसूत्र, नाक की लौंग, कान की बालियां, बड़े बाजू का कुर्ता व सिर का दुपट्टा पेपर लीक के माध्यम नहीं, इसलिए इस दिखावे व तामझाम की कोई आवश्यकता नजर नहीं आती है।