अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस: नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला, दिलाई गई नशामुक्ति की शपथ

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान–विकसित भारत की पहचान' के तहत 17 से 26 जून 2026 तक जिलेभर में विभिन्न स्तरों पर जनजागरूकता एवं सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के समापन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के तहत जागरूकता कार्यशालाएं, शपथ ग्रहण समारोह और जनजागरण गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान के दौरान 'नशा मौज नहीं, मौत है' विषयक फिल्म का प्रदर्शन किया गया तथा सार्वजनिक स्थलों पर कठपुतली शो एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। जिले के विभिन्न कोचिंग संस्थानों एवं नर्सिंग कॉलेजों में युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए 'नशे को ना, जीवन को हां' विषय पर शपथ दिलाई गई। ई-प्रतिज्ञा के माध्यम से भी बड़ी संख्या में लोगों ने नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। टीबी अस्पताल के सभागार में 'नशा करता, जीवन नाश' विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यशाला में टीबी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं डी-एडिक्शन क्लिनिक के डॉ.सी.एस. मोदी ने नशे के विभिन्न प्रकार तथा शरीर के अंगों पर उसके दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं पीबीएम अस्पताल के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ.श्रीगोपाल ने नशे से होने वाले मानसिक, सामाजिक एवं पारिवारिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक एल.डी. पंवार ने कहा कि 'नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान' को सफल बनाने के लिए सामाजिक सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने 'नशा भारत छोड़ो' का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही समाज को नशामुक्त बनाया जा सकता है।

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