पिलानी (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की सनातन धर्म की सबसे कठिन व्रतों में से एक 'निर्जला एकादशी' का पर्व गुरुवार को पूरे श्रद्धा, उल्लास और सेवा भाव के साथ मनाया गया। भीषण गर्मी और तपते पारे के बीच, शहर और आस-पास के क्षेत्रों में हर तरफ दान-पुण्य और सेवा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। सुबह से ही शहर के मुख्य चौराहों, बाजारों और धार्मिक स्थलों के बाहर सामाजिक संगठनों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा जगह-जगह सेवा स्टॉल लगाए गए। चिलचिलाती धूप में सफर कर रहे राहगीरों, रिक्शा चालकों और राहगीरों को रोक-रोक कर ठंडा पानी, गन्ने का जूस, रूहअफजा का शरबत और शिकंजी पिलाई गई। इस पावन दिन पर गौ-सेवा का भी विशेष महत्व देखा गया। सुबह से ही स्थानीय गौशालाओं में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने गायों को हरा चारा, लापसी, गुड़ और फल खिलाकर पुण्य कमाया। कई परिवारों ने गौशालाओं में गुप्त दान भी दिया और गायों के पीने के पानी के लिए खेलियों की व्यवस्था करवाई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर जल और मटके का दान सबसे उत्तम माना जाता है। इसी को देखते हुए लोगों ने पंडितों और जरूरतमंदों को मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे, छाते और चप्पलें,
सत्तू, आम और खरबूजे दान किए। श्रद्धालुओं का कहना है "इस भीषण गर्मी में किसी प्यासे को पानी या ठंडा शरबत पिलाना ही सबसे बड़ी पूजा है। निर्जला एकादशी हमें त्याग और जीव मात्र के प्रति दया का संदेश देती है।" शाम तक चलते रहे इन सेवा कार्यों ने न केवल तपती गर्मी में लोगों को बड़ी राहत दी, बल्कि समाज में भाईचारे और सेवा की संस्कृति को और मजबूत किया। कुल मिलाकर, निर्जला एकादशी पर पूरा शहर सेवा और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। इस मोके पर गौ सेवक सुमेर स्वामी, पूर्व पार्षद नरेंद्र गुर्जर, टिंकू आलड़िया, लोकेश कुमावत, विक्रम आलड़िया, नंदलाल सैनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।