शिव नगरी के नाम से विख्यात चिड़ावा नगरी का जनमानस एक घिनौनी हरकत को लेकर आक्रोशित हैं। जम जम नामक रेडिमेड वस्त्र के शोरूम के ट्रायल रूम में महिलाओं के अश्लील विडियो बनाते हुए एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तारी की है। यह मुद्दा नारी सम्मान और अस्मिता से जुड़ा बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। घटना के काफी समय बीत जाने पर भी पुलिस प्रशासन द्वारा अभी कोई ठोस कार्रवाई के प्रमाण नहीं मिले हैं। इस जघन्य कृत्य को लेकर कल चिड़ावा बंद रहा व इसमें भाजपा की भागीदारी के साथ ही सामाजिक संगठनों व सर्व समाज की भागीदारी देखी गई। यदि इस बंद को राजनीतिक दृष्टि से देखें तो भाजपा विपक्ष की भूमिका में नजर आ रही थी। डबल इंजन सरकार होने के बावजूद भाजपा को किसी मामले को लेकर आंदोलन करना पड़े यह स्थानीय नेताओं की जयपुर तक शासन में कितनी भागीदारी है, इसका एक नमूना देखने को मिला। इस बंद को यदि सामाजिक दृष्टि से देखें तो सर्व समाज की एकजुटता ने यह दिखा दिया कि नारी के सम्मान व अस्मिता पर हमला करने वाले व्यक्ति को बक्शा नहीं जायेगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। वैसे देखा जाए तो किसी भी मुद्दे पर बंद का आह्वान तभी किया जाता है, जब किसी मामले को लेकर पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं करता हो। इस मामले में अपराध के अनूरूप धाराओं मे आरोपी गिरफतार हो चुका है। यह देखा गया है कि मलसीसर में एक लड़के से मारपीट के आरोप में आरोपी की सार्वजनिक परेड हो सकती है तो इस अमानवीय व महिलाओं की अस्मिता से जुड़े मामले के आरोपी की अभी तक सार्वजनिक परेड क्यों नहीं करवाई गई। इसके साथ ही उसके आईफोन की साइबर सेल में जांच होनी चाहिए कि अभी तक आरोपी कितनी महिलाओं को इस अपराध का शिकार बना चुका है। इसके साथ ही कहीं यह कोई राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा तो नहीं है व यह अश्लील विडियो वह कहां प्रेषित करता था। इस गिरोह की गिरफत में आकर कोई महिला इस गिरोह से ब्लेकमेल का शिकार तो नहीं हुई है। बंद के समय उपरोक्त तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए पुलिस प्रशासन से पुरजोर मांग करनी चाहिए थी कि आखिर जांच कहां तक पहुंची है। इसके साथ ही हर शोरूम के ट्रायल रूम की गहनता से जांच होनी चाहिए कि कहीं कोई हिडन कैमरा तो नहीं लगा रखा, जिससे महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा पर आंच आ रही है। इस मामले में सार्वजनिक व हिंदुवादी संगठनों की तत्परता को नकारा नहीं जा सकता लेकिन संवैधानिक पद पर विराजमान कांग्रेस के सांसद, पिलानी विधानसभा के विधायक व चिड़ावा नगर पालिका अध्यक्षा की भूमिका संदेहास्पद लगती है कि एक सार्वजनिक बयान देकर इस मुद्दे की गंभीरता को नजरंदाज करना कहीं न कहीं उनकी मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। कांग्रेस की सदैव तुष्टीकरण की राजनीति रही है और शायद यही कारण होगा कि वोट बैंक के चलते उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध करना या आंदोलन करना उचित नहीं समझा। पिलानी विधानसभा व चिड़ावा की जनता सांसद, विधायक व नगर पालिका अध्यक्षा की भूमिका को बहुत करीब से देख रही है और उसका माकूल जवाब समय आने पर देने का मानस बना चुकी है।
3/related/default