योग भारत की ऋषि मुनि परम्परा है, उपजी एक अमूल्य विरासत है। प्राचीन काल में ऋषियों और मुनियों के गहन ध्यान, तपस्या और आत्म संयम के माध्यम से योग की खोज की थी। उन्होंने मन, श्रुत और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की इस कला को विकसित किया, जिससे मानव ईश्वर और ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ सके। योग एक शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की मूल आत्मा और शरीर का एक शाश्वत विज्ञान है। करो योग, रहो निरोग केवल एक कहावत नहीं बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने का एक अचूक मंत्र है। नियमित योगाभ्यास से शारीरिक शक्ति बढती है, मानसिक तनाव दूर होता है और बहुत सी बीमारियों जैसे मधुमेह, उक्त रक्तचाप और मोटापा नियंत्रित होता है व मानसिक तनाव दूर होता है। प्राणायाम जो सांस लेने की क्रियाओं जैसे अनुलोम-विलोम और कपाल शक्ति से फेफड़े मजबूत होते हैं और रक्त शुद्ध होता है। सूर्य नमस्कार तो 12 आसनों का संपूर्ण योग है, जो पूरे शरीर की मांसपेशियों को ऊर्जा प्रदान करता है। वर्तमान में योगगुरु रामदेव का योग को जन जन तक पहुंचाने में क्रांतिकारी योगदान है। उन्होंने इसे महलों और आश्रमों से निकाल कर आम लोगो के घरों तक पहुंचाया। योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में योगगुरु रामदेव का विशेष योगदान है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दामों के प्रति जागरूकता पैदा करना है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिसम्बर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा मे 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा था। संयुक्त राष्ट्र संघ के 177 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव को बिना किसी मतदान के स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को अपनाने की अपील करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने भाषण में कहा था कि योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है। यह मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य, संयमित विचार और पूर्ति प्रदान करने वाला स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। हमारी बदलती जीवन शैली में चेतना बनकर हमें जलवायु से निपटने में मदद कर सकता है।
*अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) के प्रबुद्ध पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं।*