कोटपूतली (ईशाक खान): पनियाला से किशनगढ़ तक प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के विरोध में किसानों का आक्रोष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। किसान महापंचायत के तत्वाधान में सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों, महिलाओं व ग्रामीणों ने कस्बे में विशाल मौन जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। मौन जुलूस नगर परिषद कार्यालय के सामने से शुरू होकर जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। इसके बाद जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर एक्सप्रेस वे को तुरंत निरस्त करने की मांग की गई।
*06 महीने से जारी है ’‘जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे’’ का संघर्ष*
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में ग्राम चिमनपुरा में आयोजित किसान सम्मेलन में किसानों ने “जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे“ का ऐतिहासिक संकल्प लिया था। तब से लेकर पिछले 06 महीनों से किसान महापंचायत के नेतृत्व में यह आंदोलन निरंतर जारी है। आंदोलन के विभिन्न चरणों में किसान कई बड़े कदम उठा चुके हैं। विगत माह किसानों ने पनियाला से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक विशाल ट्रैक्टर रैली निकालकर अपनी ताकत दिखाई थी। वहीं 15 से 17 जून तक जिला कलेक्ट्रेट के सामने किसानों ने तीन दिवसीय धरना देकर उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं 18 जून को ग्राम गोनेडा में आयोजित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में भी किसानों ने अलाइनमेंट और पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
*क्यों हो रहा है एक्सप्रेस वे का विरोध*
ज्ञापन के माध्यम से किसान महापंचायत ने एक्सप्रेस वे को ’‘जन-जमीन-जंगल-जानवर’’ और समृद्धि विरोधी बताते हुए कई गंभीर तर्क पेश किए हैं। कोटपूतली से किशनगढ़ तक पहले से ही 225 किलोमीटर लंबा 06 लेन राजमार्ग चालू है। सरकार के अनुसार नए मार्ग से केवल 44 किलोमीटर (कुछ सर्वे में 12-17 किमी) की दूरी कम होगी, जिसके लिए अरबों रुपयों की बर्बादी अनुचित है। इस परियोजना के लिए लगभग 6500 बीघा कृषि भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जो बेहद सिंचित और बहु-फसली (उपजाऊ) है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जायेगा। एक्सप्रेस वे 15 फीट ऊंचा बनना प्रस्तावित है, जिससे कई गांव और खेत दो भागों में बंट जायेंगे। खेतों तक जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की विकरालता बढ़ेगी। इस मार्ग पर ट्रैक्टर, मोटरसाईकिल, स्कूटर, साईकिल और पैदल चलने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए इसकी उपयोगिता शून्य है। ग्रीन फील्ड नाम होने के बावजूद इससे साल भर खेतों में रहने वाली हरियाली नष्ट होगी और खेजड़ी सहित अनगिनत पेड़-पौधों का विनाश होगा। मौन जुलूस और प्रदर्शन में किसान महापंचायत प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दी लाल यादव, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, प्रदेश मंत्री महेश जाखड़, प्रदेश युवा उपाध्यक्ष संदीप यादव, जिलाध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर, महिला तहसील अध्यक्ष बीना शर्मा, जिला उपाध्यक्ष सुभाष यादव, सहमाल गुर्जर, दिनेश गुर्जर, सुगाराम रावत, 94 वर्षीय बुजुर्ग सुल्तान सिंह करवास, सूबेदार मूलचंद, शीशराम, बीरबल, रोहिताष, रामचंद्र बोहरा, रामशरण यादव, हरदान फॉरेस्टर, बनवारी दौराता, निशान्त, हिम्मत सिंह, बाबूलाल यादव, हेमराज यादव व अविनाश शर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनहित और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को निरस्त नहीं किया तो उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।