सहजन आधारित कृषि प्रणाली से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): जिले में सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के तहत तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), बीकानेर में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष डॉ.सुधीर कुमार तथा नाबार्ड के डीडीएम अरविंद चाहर की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर डॉ.सुधीर कुमार ने किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए मोरिंगा आधारित कृषि प्रणाली अपनाने पर बल देते हुए कहा कि मोरिंगा एक बहुउपयोगी फसल है, जिसका उपयोग मानव पोषण, पशुपालन, कृषि तथा विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। नाबार्ड के डीडीएम अरविंद चाहर ने मोरिंगा को “चमत्कारी वृक्ष” बताते हुए कहा कि यह रोजगार सृजन, आर्थिक उन्नति तथा पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इसके औषधीय गुणों पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि मोरिंगा मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक है। काजरी के अध्यक्ष डॉ.नवरत्न पंवार ने इस परियोजना को जिले के किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि आगामी जुलाई एवं अगस्त माह में मोरिंगा आधारित कृषि प्रणाली पर छह और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से इन प्रशिक्षणों में भाग लेकर परियोजना का लाभ उठाने का आह्वान किया। परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ.बैबेल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 40 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 मोरिंगा पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह परियोजना पिछले दो वर्षों से नाबार्ड के सहयोग से काजरी, बीकानेर में संचालित की जा रही है। इसके तहत जिले के लगभग 300 किसानों को 3 लाख से अधिक पौधे वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ.मनोज गोरा, मूल सिंह गहलोत एवं डॉ.सीताराम जाट ने सहयोग प्रदान किया।

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