अभिमान त्याग कर ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है: पंडित तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): भक्ति स्व भंजन का नाम है। ज़ब मनुष्य अपनेपन का भाव त्याग कर अपने इष्ट को ही सब कुछ समझने लगता है यानी स्व का अभिमान पूर्ण रूप से दूर कर देता है, तब वह भक्त बन जाता है और उसे ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। उक्त विवेचना दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से विभूषित वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेहिकलां के नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रहीं श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन ध्रुव प्रसंग की व्याख्या करते हुए कही। तिवाड़ी ने बताया कि ध्रुव ने स्वयं को भगवान के चरणों मे समर्पित कर दिया तो भगवान प्रसन्न होकर प्रगट हो गए। कथा में भगवान कपिल के आध्यात्मिक प्रसंग की बड़ी सुंदर वैज्ञानिक व्याख्या की गई। शिव सती चरित्र सृष्टि वर्णन सहित अनेक सुंदर कथा भी सुनाई गई। कथा से पूर्व डॉ.जगदीश प्रसाद शर्मा को पंडित बालकिशन चौरसिया ने सपत्नीक वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत पुराण एवं व्यास पूजन करवाया। कथा में ध्रुव वरदान की सजीव झाकी सजाई गई। भक्तिमय संगीत से आनन्द की वर्षा हुई। कथा मे हजारी लाल शर्मा, अशोक शर्मा, 
ओमप्रकाश महरिया, विक्रम शर्मा, करन सिंह शेखावत, राकेश पुनिया, राजेंद्र सिंह शेखावत, मातुराम महरिया, संजय भगत, नत्थुराम शर्मा, जितेंद्र जांगिड़, ब्रह्मानंद पुनिया, सत्यनारायण कुमावत, प्रमोद भगत, होशियारी लाल शर्मा, गजाननंद शर्मा, अनिल शर्मा, धरमसिंह शेखावत, रवि कुमावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष मौजूद रहे मौजूद रहे।

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