नाम नही सोच बदलने की जरूरत

AYUSH ANTIMA
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पिलानी (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): यदि एक आंख के व्यक्ति का नैनसुख नामकरण कर दिया जाए तो क्या उसको दोनों आंखों से दिखाई देने लगेगा। इसी परिपाटी को लेकर झुंझुनूं विधायक इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने की अनुशंसा राज्य सरकार से की है। इस्लामपुर गांव की लखोटिया स्कूल के पास का विहंगम दृश्य इस बात को इंगित कर रहा है कि विधायक को नाम नही अपनी सोच बदलने की जरूरत है। क्या नाम बदलने से यह गंदे पानी की झील पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थल बन जायेगा। स्कूल के बच्चों के लिए यह झील स्कूल में जाने के लिए बहुत ही मशक्कत वाला कार्य है। यह केवल लखोटिया स्कूल के पास का ही मामला नहीं बल्कि कमोबेश यही स्थिति साफ सफाई को लेकर व नालियों को लेकर पूरे गांव की है। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जो चुनावों के समय आमजन से वादे किए गये थे, वो केवल वादे ही रह गये। आमजन सरकार व चुने हुए जन प्रतिनिधियों से मूलभूत सुविधाओं की मांग करता है और इसी आशा के साथ वोट देता है कि उनके कार्यकाल में गांव का विकास होगा लेकिन झुंझुनूं विधायक को गांव की मूलभूत सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है, बस नाम बदलने पर आमादा है। विधायक की इस हठधर्मिता को लेकर यही कहा जा सकता है कि गांव का नाम बदलने से कुछ हासिल होने वाला नहीं अपनी सोच बदलिए।

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