टोंक (लालचंद माली): जिले के मोटूका गांव में सरकारी नाड़ी को खुर्द-बुर्द करने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जल संरक्षण के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी मशीनों की मदद से सरकारी भूमि पर अवैध खनन कर प्राकृतिक जल प्रवाह को बदला जा रहा है तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार जयपुर-कोटा नेशनल हाईवे किनारे स्थित मोटूका गांव में एलएनटी और जेसीबी मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर मिट्टी और खनिज का अवैध दोहन किया जा रहा है। आरोप है कि खनन से निकाली गई मिट्टी को सरकारी नाड़ी में डाला जा रहा है, जिससे उसकी मूल संरचना प्रभावित हो रही है और जल स्रोत के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण, जल संचयन और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर मोटूका में सरकारी नाड़ी को अवैध तरीके से मिट्टी डालकर खत्म करने का खेल जारी है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका है, बल्कि बरसाती पानी के प्राकृतिक बहाव पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चल रही इस गतिविधि की जानकारी संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे गांव के लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरकारी भूमि को अतिक्रमण व अवैध खनन से मुक्त कराने की मांग की है। अवैध खनन के इस कथित काले कारोबार से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर सरकारी संपत्ति और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कब कार्रवाई होती है। यह मामला सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और जल संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
सरकारी नाड़ी पर अवैध खनन का खेल: जल संरक्षण की बातों के बीच सरकारी संपत्ति पर चल रही मशीनें
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June 24, 2026
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