नारायणपुर (प्रदीप जांगिड़): कस्बे में निर्जला एकादशी का पर्व गुरुवार को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की इस तिथि पर पीरसंज्यानाथ मंदिर, चौगान मंदिर और पुरुषोत्तम आश्रम सहित स्थानीय मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना हुई। भीषण गर्मी में भक्तों ने निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी नारायण से सुख समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिरों में विशेष सजावट की गई और श्रीहरि के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गई। भगवान को पीले फूलों और विशेष शृंगार से सजाया गया।गर्मी को देखते हुए भक्तों ने राहगीरों के लिए जल, शरबत और छाछ के वितरण यानी प्याऊ का आयोजन किया। इसके अलावा मिट्टी के घड़े, फल, पंखे और छाते दान किए गए। दिनभर कस्बे के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालुओं द्वारा भजन कीर्तन और मंत्र जाप किए गए।पुरुषोत्तम आश्रम के महंत महामंडलेश्वर जनार्दन दास महाराज और चौगान मंदिर के महंत तुलसीदास महाराज ने बताया कि यह व्रत सबसे कठिन माना जाता है। इसमें अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्षभर में 24 और पुरुषोत्तम मास में 26 एकादशी होती हैं। इसमें निर्जला, जलझूलनी, देवउठनी और निर्जला को बड़ी एकादशी माना गया है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। कथा के अनुसार माता कुंती और चार पांडव निर्जला व्रत करते थे, लेकिन भीम नहीं रखता था। सभी के दबाव और व्यासजी की समझाइश पर भीम ने व्रत रखा, तभी से इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाने लगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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