भारतीय नागरिकता को लेकर जो बयान आ रहे हैं, उससे असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। विदेश मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रुप से यात्रा दस्तावेज है। इसे कानूनी रूप से भारतीय नागरिक होने का अंतिम या ठोस प्रमाण नहीं माना जा सकता है। भारतीय नागरिकता को लेकर संवैधानिकता संस्था चुनाव आयोग ने कहा है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड व वोटर आईडी केवल पहचान व निवास का दस्तावेज है, इन्हें भी नागरिकता दस्तावेज नहीं माना जा सकता है। चुनाव आयोग ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नामांकन के लिए आधार का उपयोग केवल पहचान स्थापित करने हेतु किया जाता है न कि भारतीय नागरिकता के प्रमाण के रूप में। नागरिकता अधिनियम 1955, भारतीय नागरिकता के लिए अधिग्रहण और समाप्ति का मुख्य कानून हैं। संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-II) के बाद यह अधिनियम यह तय करता है कि कोई व्यक्ति कैसे भारत का नागरिक बन सकता है या उसकी नागरिकता कैसे समाप्त हो सकती है तत्पश्चात नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत अफगानिस्तान, बंगलादेश और पाकिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए नियमों को सरल बनाया गया है। इस अधिनियम के आलोचकों का मानना है कि यह कानून भारत के धर्मनिरपेक्ष सिध्दांतों के खिलाफ है क्योंकि इसमे एक विशेष धर्म और कुछ पडौसी देशों को शामिल नहीं किया गया है। वही सरकार और इस अधिनियम के समर्थकों का तर्क है कि यह कानून पड़ोसी इस्लामी देशो में प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और आश्रय देने के लिए बनाया है, वही गृह मंत्रालय द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत भारतीय नागरिक होने के मापदंडों में जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीकरण और क्षेत्र समावेशन से प्राप्त की जा सकती है। अभी तक आम लोगों की यह धारणा रही थी कि वैध पासपोर्ट, आधार भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने के वैध दस्तावेज है लेकिन चुनाव आयोग, विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकता को लेकर आमजन में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। निश्चित रूप से जो अवैध रोहंगिया इस देश में रहकर देश के नागरिकों के लिए बनाई गई जन कल्याणकारी योजनाओ पर डाटा डाल रहे हैं, उनको देश से बाहर खदेड़ना ही होगा। यदि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार गंभीरता से कार्य नहीं करेगी तो भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना तो दूर, हिंदु इस देश में अल्पसंख्यकों की श्रेणी में आ जायेंगे। भारतीय नागरिकता के दस्तावेजों को लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) के कार्टूनिस्ट महेन्द्र सिंह शेखावत ने अपनी एक उत्कृष्ट कार्टून द्वारा भारतीय जनमानस की पीड़ा उजागर की है कि क्या मृत्यु प्रमाण पत्र ही बचा है, जो भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने का अंतिम दस्तावेज है ।
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