शरीर रथ है आत्मा इसकी सारथी: रथ द्वारा सारथी को भगवान तक पहुंचना मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य: पंडित तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): जरा जीव विचारों मन मे तेरी आत्मा का कैसा रूप है। ये देह नहीं है तेरी आत्मा तू तो सतचित आनन्द रूप है। इस भजन के माध्यम से वाणी भूषण प्रभुशरण तिवाड़ी ने स्पष्ट किया की जो शरीर हम देख रहें है, वह हमारा नहीं है। उन्होंने कहा की द्रष्टा एवं दृश्य कभी एक नहीं हो सकते। हम जिसको देख रहें है, वह हम कैसे हो सकते है, देखने वाला मै हूँ, जो शरीर दिखाई दे रहा है वह मै नहीं हूं। इस प्रकार यह शरीर हमारा नहीं है, मै स्वयं आत्मा हूं। आत्मा ईश्वर का अंश है, जैसे बूँद समुद्र का अंश है। सेहिकलां के नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस तिवाड़ी ने कहा की मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य भगवान की प्राप्ति है। यह शरीर रथ है आत्मा इसकी सारथी है। रथ द्वारा सारथी को भगवान तक पहुंचना है। कथा में श्रीकृष्ण- सुदामा की सजीव झांकी एवं मधुर भजनों से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के प्रारंभ में यजमान दीनदयाल शर्मा व अशोक शर्मा ने सपत्नीक भागवत व व्यास पूजन किया। कथा की समाप्ति पर आयोजन समिति के सदस्यों ने कथा व्यास, वाणी भूषण प्रभुशरण तिवाड़ी का अभिनंदन किया। कथा के पश्चात मुख्य यजमान दीनदयाल शर्मा द्वारा हवन एवं प्रीतिभोज का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ.जगदीश प्रसाद शर्मा, विक्रम शर्मा, करन सिंह शेखावत, सत्यनारायण कुमावत, हजारी लाल शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, भागीरथ जांगीड, राकेश पुनिया, प्रवीण शर्मा, राजेंद्र सिंह शेखावत, मातुराम महरिया, संजय भगत, नत्थुराम शर्मा, जितेंद्र जांगीड, ब्रह्मानंद पुनिया, संतोष सिंह शेखावत, रतनलाल शर्मा, पवन शर्मा, योगेश जांगीड, निशांत जांगीड, अरविन्द शर्मा, संजय भगत, सीताराम शर्मा, अशोक शर्मा, संतोष सिंह शेखावत, ओमप्रकाश महरिया, प्रमोद भगत, होशियारी लाल शर्मा, गजाननंद शर्मा, अनिल शर्मा, धरम सिंह शेखावत, रवि कुमावत, कैलाश वर्मा, राजेंद्र नायक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष मौजूद रहे मौजूद रहे।

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