बीकानेर (मुकेश रामावत): राजस्थान में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों के बीच बीकानेर जिला परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संभागीय आयुक्त बीकानेर के स्पष्ट आदेशों को जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा लगातार नजरअंदाज करने का मामला सामने आया है।
*क्या है पूरा मामला*
मामला लूणकरणसर तहसील के मकडासर गांव का है। निवासी डूंगर सिंह ने ग्राम पंचायत में गबन और वित्तीय अनियमितता की शिकायत संभागीय आयुक्त बीकानेर को दी थी।
*3 महीने से आदेश, कार्रवाई शून्य*
शिकायत पर संभागीय आयुक्त बीकानेर ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बीकानेर को पिछले तीन महीने से लगातार आदेश दिए कि जांच कमेटी गठित कर मौके पर जाकर परिवादी के साथ भौतिक सत्यापन किया जाए, फोटो सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाए और यदि दोषी पाया जाए तो कार्रवाई की जाए।
*आरोप: बैठक कर भेज दी फर्जी रिपोर्ट*
आरोप है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इन आदेशों को नहीं माना। हालात इतने गंभीर हैं कि जिला परिषद कार्यालय में बैठक कर ही फर्जी रिपोर्ट तैयार कर संभागीय आयुक्त को भेज दी गई। जबकि आदेश मौका रिपोर्ट, परिवादी के साथ भौतिक सत्यापन और फोटो सहित रिपोर्ट तैयार करने के थे।
*एडवोकेट ने उठाई आवाज*
एडवोकेट सुरेश गोस्वामी ने डूंगर सिंह की ओर से कई पत्र लिखकर संभागीय आयुक्त को मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बीकानेर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
*सरकार की छवि पर सवाल*
एक तरफ राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन-प्रशासन की बात कर रही है, वहीं जिला परिषद बीकानेर की इस कार्यशैली से उसे बढ़ावा मिल रहा है। बीकानेर में प्रशासनिक व्यवस्था का यह आलम सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है।
*बड़ा सवाल: अंकुश कौन लगाएगा*
अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या नहीं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बीकानेर की कथित निरंकुशता पर कब लगाम लगेगी या प्रशासनिक व्यवस्था इसी तरह चलती रहेगी।