पिलानी (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): पिलानी की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरा को नई ऊर्जा प्रदान करने के उद्देश्य से वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्य संरक्षक डॉ.मधुसूदन मालानी के मुख्य संयोजन और सौजन्य से बिरला कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रांगण में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन हरियाणा के सुप्रसिद्ध गीतकार, साहित्यकार एवं हरियाणा साहित्य अकादमी से सम्मानित डॉ.रमाकांत शर्मा के पिलानी आगमन के उपलक्ष्य में उनके सम्मान में आयोजित किया गया था। साहित्य के संरक्षक के रूप में डॉ.मधुसूदन मालानी की विशेष पहल
इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डॉ.मधुसूदन मालानी ने न केवल इस आयोजन की रूपरेखा तैयार की, बल्कि साहित्य को समाज की 'आत्मा' बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा भी उठाया। अपने ओजस्वी संबोधन में डॉ.मालानी ने कहा, "साहित्य मनुष्य के जीवन के हर चरण का अभिन्न अंग है। बाल्यावस्था की लोरियों से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक के शांति-पाठ के श्लोक, सब काव्य के ही रूप हैं। शब्द मनुष्य को दिशा और संस्कार देते हैं।" उन्होंने पिलानी की शैक्षिक और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की भव्यता
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकार मातुराम वर्मा ने की। संचालन कवि अनिल शर्मा ‘चिंतक’ ने किया तथा समदर्शी नोबल कॉज फाउंडेशन के संस्थापक योगेश के. समदर्शी ने कार्यक्रम के संयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शब्दांजलि का प्रवाह
गोष्ठी का मुख्य आकर्षण डॉ.रमाकांत शर्मा रहे, जिन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनका प्रसिद्ध गीत— "माना समय भयंकर ठहरा... इतनी तो होशियारी कर तू"—ने पूरे सभागार में प्रेरणा का संचार कर दिया। उनके अतिरिक्त कवि लोकेश शर्मा, कवयित्री रोशनी शर्मा, पुष्पलता आर्य, नगेन्द्र शर्मा ‘निकुंज’, डॉ.एलके कांत शर्मा और योगेश समदर्शी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को स्वर प्रदान किया।
*विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति*
कार्यक्रम में मोटिवेटर राजन शर्मा ने भी अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने हिंदी साहित्य को समाज की प्रेरणा का मुख्य स्रोत बताते हुए डॉ.मधुसूदन मालानी के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कार्यक्रम में नगेन्द्र शर्मा ‘निकुंज’, प्रदीप शर्मा, आर्टिस्ट एसएन वर्मा, डॉ.आशा, श्वेता शर्मा, शुभांगी, सुरेश कुमार, दीपक, दीपचंद, एडवोकेट प्रमोद कुमार मांजू, अरुण जांगिड़, विक्रम सैनी, विनोद कुमार, नरेन्द्र सिंह, छेत्तीलाल शर्मा, राकेश सोनी, डॉ.एलके कांत शर्मा, योगेश समदर्शी और अलका रानी सहित पिलानी के अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। अंत में डॉ.मधुसूदन मालानी ने पिलानी की साहित्यिक चेतना को समृद्ध करने के उद्देश्य से पधारे सभी साहित्यकारों, अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन पिलानी के साहित्यिक इतिहास में एक अविस्मरणीय कड़ी के रूप में दर्ज हो गया है।