जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): स्वयंसिद्धा साहित्यिक संस्थान जयपुर, राजस्थान
एवं सीके बिड़ला हॉस्पिटल, जयपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में पर्यावरण दिवस 05 जून के उपलक्ष्य में 07 जून 2026 को आयोजित काव्य गोष्ठी एक पेड़ माँ के नाम एवं स्वास्थ्य-परिचर्चा वरिष्ठ साहित्यकार फारुक अफ़रीदी जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। आगन्तुक अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारम्भ किया गया। अर्चना सिंह ‘अना’ ने मधुर स्वर में वन्दना प्रस्तुत कर माँ शारदे का आह्वान किया। अतिथियों का स्वागत के उपरांत स्वयंसिद्धा साहित्य की संस्थापक ज्ञानवती सक्सैना ने संस्था की ऑनलाइन-ऑफ़लाइन गतिविधियों का परिचय देते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति सजग रहकर हम सभी एक जागरूक और ज़िम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएँ।
मुख्य प्रवक्ता प्रो.अवधेश कुमार (पूर्व डीन, मणिपाल यूनिवर्सिटी) ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं बल्कि हमारे स्वयं के प्रति समाज के प्रति और भविष्य की पीढ़ियाँ के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। कार्यक्रम अध्यक्ष फ़ारुक अफ़रीदी ने अपने उद्बोधन में स्वयंसिद्धा साहित्यिक संस्थान के व्यवस्थित प्रेरक आयोजन की प्रशंसा कर हुए पर्यावरण पर भाव सिक्त कविता “माँ यह पेड़ नहीं तुम हो” सुनाकर सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। संस्था की संरक्षक प्रो.कुसुम शर्मा ने कहा कि पर्यावरण से तात्पर्य हमारे आस पास का वह संपूर्ण परिवेश से है, जो हमें जीवित रहने और पनपने में सहायता करते हैं, वो सभी जैविक और अजैविक तत्व इसमें सम्मिलित रहते हैं। खुद भी पेड़ लगाओ इतने, धरती स्वर्ग दिखाई दे, सलौनी क्षितिज के मधुर और प्रभावी संचालन में सभी उपस्थित रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ.एनएल शर्मा, अनुराधा माथुर, रमा भाटी, कमलेश शर्मा, ज्योत्सना सक्सेना, अर्चना निगम, वन्दना सक्सेना, उषा शर्मा ‘दीपशिखा’, सौ.निशा बुधे झा, रजनी मिश्रा, कमलेश चौधरी, पूजा उपाध्याय, किशोर पारीक, महबूब अली, रामकिशोर वर्मा, इन्द्र कुमार भंसाली, स्नेहलता सहाय, राजेश भटनागर, कुमकुम माथुर, मनोरमा शर्मा ‘मनोरम’, सलौनी क्षितिज, अर्चना सिंह ‘अना’, डॉ.नीलम कालरा ने पर्यावरण संरक्षण पर संदेश परक भाव भरे गीत, मुक्तक, छंद बुद्ध और छंद मुक्त शानदार रचनाओं की सरस सरिता बहाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। सरिता बहाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। डॉ.अजय शर्मा ने खर्राटे क्यों आते हैं विस्तार से बताया और जिज्ञासु श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर बड़े धैर्यपूर्वक सहजता से दिया। इस तरह आयोजन में स्वास्थ्य और साहित्य की गंगा-यमुना की पावन शीतल कल-कल में सभी प्रकृति प्रेमियों ने डुबकी लगाई, अवगाहन किया। तल कल-कल में सभी प्रकृति प्रेमियों ने डुबकी लगाई, अवगाहन किया, तदुपरांत एक डब्बे में सभी आगन्तुक प्रकृति प्रेमियों के नाम डाले गए और कार्यक्रम अध्यक्ष फारुक अफ़रीदी द्वारा एक पर्ची उठाकर ज्योत्सना सक्सैना का नाम घोषित किया गया, जिन्हें माला बार ज्वेलर्स की ओर से एक डिनर सेट उपहार में दिया गया। पर्यावरण के प्रति जागरुक दीपिका चौधरी द्वारा अतिथियों को पौधे व मालाबार ज्वेलर्स ने उपहार स्वरूप मग भेंट किए।