निवाई (लालचंद माली): गांव कांटोली स्थित महाभारतकालीन मां भद्रकाली मंदिर में आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जहां मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीराम महाराज अघोरी को सैकड़ों संत-महात्माओं के सानिध्य में कानों में कुंडल धारण करवाए गए। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समाज के लोग बने। बताया गया कि अघोर एवं नाथ संप्रदाय में कानों में धारण किए जाने वाले कुंडल, जिन्हें दर्शन या मुद्रा भी कहा जाता है, केवल आभूषण नहीं बल्कि वैराग्य, योग साधना और संप्रदाय की विशेष पहचान माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दीक्षा और साधना के उच्च स्तर की उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है, जो विरले संतों को ही प्राप्त होती है। मान्यता है कि ये कुंडल शिव और शक्ति के प्रतीक होने के साथ सूर्य और चंद्रमा के एकीकरण का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा, साधना शक्ति तथा सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के अनुभव एवं समाधान की क्षमता से भी जोड़ा जाता है। संत समाज के अनुसार ऐसी सिद्धि प्राप्त कर चुके साधु-संत ही इन कुंडलों को धारण करने के अधिकारी होते हैं। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा तथा सैकड़ों संत-महात्मा एवं भक्तजन उपस्थित रहे।
महाभारतकालीन मां भद्रकाली धाम में आध्यात्मिक गौरव का क्षण, पीठाधीश्वर श्रीराम महाराज ने धारण किए कुंडल
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June 21, 2026
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