निवाई (लालचंद माली): न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग का खेल बेखौफ तरीके से जारी रहने का मामला सामने आया है। अतिरिक्त संभागीय आयुक्त अजमेर द्वारा संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बाद भी भूमाफियाओं द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध प्लॉट काटे जा रहे हैं। इससे प्रशासनिक कार्यशैली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार विवादित खसरा संख्या 4538/4 की भूमि पर न्यायालय द्वारा आगामी सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए गए हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी स्थगन आदेश दर्ज है, इसके बावजूद मौके पर गतिविधियां लगातार जारी हैं। आरोप है कि कृषि भूमि को अवैध रूप से प्लॉटिंग में तब्दील करने का कार्य खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार एवं पटवारी पूरे मामले से अवगत होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। इससे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर भूमाफियाओं को प्रशासनिक स्तर पर मौन स्वीकृति तो प्राप्त नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर अवैध गतिविधियां जारी हैं तो यह केवल न्यायिक प्रक्रिया को चुनौती देना ही नहीं बल्कि राजस्व विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग से भविष्य में भूमि का मूल स्वरूप बदलने के साथ-साथ सरकार को राजस्व का भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्य प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर न्यायालय के स्थगन आदेश की अनदेखी किसके संरक्षण में की जा रही है। संबंधित विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहा है। क्या प्रशासन भूमाफियाओं पर शिकंजा कस पाएगा या यह मामला भी सरकारी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा। क्षेत्रवासियों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
*न्यायालय के स्थगन आदेश को ठेंगा: प्रशासन की चुप्पी से बेखौफ भूमाफियाओं का अवैध प्लॉटिंग खेल जारी
By -
June 28, 2026
0
Tags: