*जान देंगे, जमीन नहीं देंगे के नारे के साथ किसानों का तीन दिवसीय धरना शुरू

AYUSH ANTIMA
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कोटपूतली (ईशाक खान): कोटपूतली से किशनगढ़ के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रैस वे और भारत माला परियोजना के विरोध में किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसके विरोध में सोमवार से तीन दिवसीय धरना जिला कलेक्ट्रेट पर शुरू किया गया। धरने के पहले दिन किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने मोर्चा संभाला और किसानों को संबोधित किया। इस दौरान मौजूद सभी किसानों ने एक सुर में जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे का नारा बुलंद किया। किसान महापंचायत के प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया ने बताया कि सरकार की जन, जंगल, जमीन और जानवर विरोधी नीतियों का ही परिणाम यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रैस वे है। धरने को संबोधित करते हुये राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि जन, जमीन, जंगल और जानवर ही कृषि प्रधान भारत की समृद्धि की आधारशिला हैं। इन्हीं से हमारी पर्यावरणीय नीति और ’‘पहला सुख निरोगी काया’’ का संकल्प पूरा होता है लेकिन सरकारें पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर इसके विपरीत नीतियां बना रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता में भ्रम पैदा करने के लिए इस प्रोजेक्ट का नाम ग्रीन फील्ड रखा गया है। असलियत में इस परियोजना से साल भर खेतों में रहने वाली हरियाली नष्ट हो जायेगी और भारी वाहनों के चलने से पर्यावरण बुरी तरह प्रदूषित होगा। रामपाल जाट ने कहा कि जमीन से 15 फीट की ऊंचाई पर बनने के कारण यह सड़क स्थानीय आम जनता के लिए किसी काम की नहीं होगी। 90 मीटर चौड़ाई में बनने वाली इस सड़क के कारण कई गांव दो भागों में बंट जायेंगे। इससे गांवों का भाईचारा, संस्कृति, आपसी मेल-मिलाप और खेतों तक आना-जाना पूरी तरह मुश्किल हो जायेगा। इस मार्ग के बनने से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के धंधे छिन जायेंगे और कॉरपोरेट या धनाढ़य लोगों को दे दिए जायेंगे। खेतों की कनेक्टिविटी खत्म हो जायेगी। ऐसी परियोजनाएं कृषि प्रधान देश की परिस्थितियों के विपरीत हैं और समृद्धि विरोधी हैं। किसान नेताओं ने तर्क दिया कि जब कोटपूतली से किशनगढ़ तक पहले से ही 225 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध है, तो इसके समानांतर एक और एक्सप्रैस वे बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार इस नए मार्ग से केवल 12 से 17 किलोमीटर की दूरी कम होगी। लेकिन इसके लिए किसानों की सिंचित और दो-फसली उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके दुष्परिणाम स्वरूप किसान बेघर हो जायेगें और उनकी आजीविका के साधन छिन जायेगें। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन किसी भी कीमत पर सरकार को नहीं सौंपेंगे और इस परियोजना को निरस्त कराकर ही दम लेंगे। धरने पर जिलाध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, जिला उपाध्यक्ष सहमाल गुर्जर, कोटपूतली तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर, बानसूर तहसील अध्यक्ष हरिराम गुर्जर, प्रदेशाध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, प्रदेश मंत्री महेश जाखड़, मास्टर लक्ष्मीनारायण रावत, शीशराम, रामेष्वर, सूबेदार मूलचंद करवास, जिला उपाध्यक्ष सुभाष यादव, इंद्राज यादव, मास्टर रामेष्वर चेची का नांगल अध्यक्ष, हिम्मत सिंह युवा जिलाध्यक्ष, सूबेदार नरेश राजपूत भोपतपुरा ईकाई अध्यक्ष, सुगाराम रावत, छाजूराम रावत, सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास, किसान नेता रामनिवास यादव समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहें।

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