झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित अन्नपूर्णा रसोई योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। गरीबों के नाम पर सरकारी धन हड़पने की कोशिश करने वाली जिले की तीन संस्थाओं पर स्वायत्त शासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया है, साथ ही प्रत्येक संस्था पर एक-एक लाख रुपए की पेनल्टी भी लगाई गई है। कार्रवाई के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर संस्थाओं ने ऐसे-ऐसे तर्क दिए, जिन्हें पढकर विभागीय अधिकारी भी चौंक गए। विभाग ने इन जवाबों को असंतोषप्रद, अतार्किक और तथ्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया। विभाग की आईटी टीम ने मार्च और अप्रैल माह में काटे गए भोजन कूपनों की जांच की। जांच में सामने आया कि झुंझुनूं नगर परिषद क्षेत्र की रसोई संख्या 1520 और पिलानी नगर पालिका क्षेत्र की रसोई संख्या 1271 में एक ही फोटो की फोटो खींचकर नए लाभार्थी दिखाए गए और फर्जी कूपन काटे गए ताकि अधिक से अधिक भुगतान उठाया जा सके। जब झुंझुनूं की रसोई संचालित करने वाली संस्था शहरी आजीविका केंद्र संस्थान झुंझुनूं से जवाब मांगा गया तो उसने दावा किया कि कच्ची बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों के लोग प्रतिदिन भोजन करने आते हैं। इसलिए फोटो एक जैसी दिखाई दे रही हैं। विभाग ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी तरह पिलानी की रसोई में गड़बड़ी सामने आने पर संचालक संस्था जय माता दी एसएचजी पिलानी ने पूरा दोष कंप्यूटर ऑपरेटर पर मढ़ दिया लेकिन विभाग ने साफ कहा कि फर्जी कूपनों का आर्थिक लाभ संस्था को मिलता है, कंप्यूटर ऑपरेटर को नहीं। सबसे दिलचस्प जवाब चिड़ावा नगर पालिका क्षेत्र की रसोई संख्या 439 के मामले में सामने आया। यहां जांच में पाया गया कि लाभार्थियों की पुरानी तस्वीरें सुरक्षित रखकर उन्हें बार-बार अपलोड कर फर्जी कूपन काटे गए। इस पर संस्था लक्ष्मी एसएचजी चिड़ावा ने सफाई दी कि उनके यहां आने वाले लाभार्थी इतने गरीब हैं कि उनके पास पर्याप्त कपड़े नहीं हैं और वे रोज एक ही कपड़े पहनकर भोजन करने आते हैं। विभाग ने इस जवाब को भी तथ्यहीन और हास्यास्पद मानते हुए खारिज कर दिया। तीनों मामलों में दोषी पाई गई संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करते हुए संबंधित निकायों को रसोई संचालन नियमित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एक-एक लाख रुपए की पेनल्टी लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। यह राशि संस्थाओं के बिलों से समायोजित की जाएगी या फिर पीडीआर एक्ट के तहत वसूली जाएगी। जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की जीरो टॉलरेंस नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" संकल्प के अनुरूप की गई है। कार्रवाई के बाद जिले भर में अन्नपूर्णा रसोई संचालित करने वाली संस्थाओं में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं चर्चा है कि अन्य रसोइयों की जांच में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।
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