निवाई (लालचंद माली): राजस्थान के टोंक जिले में स्थित देश के प्रतिष्ठित महिला शिक्षण संस्थान वनस्थली विद्यापीठ एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। विद्यापीठ को वर्ष 1952 में राज्य सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आवंटित की गई करीब 200 एकड़ भूमि में से 36 बीघा भूमि का वर्ष 2025 में विद्यापीठ द्वारा बेचान कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार शिक्षा के लिए आवंटित भूमि का बेचान नहीं किया जा सकता है। स्थानीय ग्रामवासियों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की। शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान भूमि विक्रय से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल में प्रथम दृष्टया अनियमितता और अवैध बेचान पाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का उपयोग बालिका शिक्षा और संस्थान के विस्तार के लिए होना चाहिए था, उसका निजी स्वार्थ के चलते एक हिस्सा बेच दिया गया। उन्होंने बताया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की गई तो वनस्थली विद्यापीठ प्रबंधन के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
*इन खसरो का किया अवैध बेचान*
खसरा नंबर 75/2, 77/1, 77/2 का वनस्थली विद्यापीठ द्वारा अवैध बेचान कर रजिस्ट्री करवा दी गई है। बताया जा रहा है कि भूमि विक्रय से संबंधित दस्तावेज संबंधित पक्षों के पास मौजूद हैं। वहीं, जब इस संबंध में संस्थान की वाइस चांसलर डॉ.इना शास्त्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने भूमि विक्रय की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई। अब यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर शिक्षा के लिए आवंटित सरकारी भूमि का विक्रय किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। स्थानीय लोगों की नजरें अब प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
*इनका कहना है*
तहसीलदार नरेश गुर्जर ने बताया कि जांच के दौरान विद्यापीठ द्वारा 36 बीघा भूमि अवैध बेचान पाई गई जबकि शिक्षा के लिए आवंटित भूमि का बेचान नहीं किया जा सकता है।