बीकानेर (मुकेश रामावत): पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने और मौत का मामला तूल पकड़ चुका है। अस्पताल की लापरवाही के आरोप लगाकर परिजनों ने मोर्चरी के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
*क्या हुआ पूरा मामला*
भीनासर क्षेत्र की निवासी शारदा ने 3 जून को पीबीएम में ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर 5 जून को उसे मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट किया गया। किडनी फेल और गंभीर जटिलताओं के कारण शारदा 5 दिन वेंटिलेटर पर रही और रविवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी आंखों की रोशनी भी चली गई थी। अस्पताल में अब तक 2 प्रसूताओं प्रीति और शारदा की मौत हो चुकी है। वहीं आईसीयू में भर्ती कमला की हालत लगातार बिगड़ रही है। 12 घंटे में उसका यूरिन आउटपुट सिर्फ 25 ML रहा। राहत की बात ये है कि तीसरी प्रसूता इमरती की हालत नियंत्रण में है और मंगलवार को उसे छुट्टी मिल जाएगी।
*परिजन क्यों भड़के*
शारदा की मौत के बाद सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराने और शव लेने से परिजनों ने इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक लापरवाही बरतने वाले दोषी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई और आर्थिक संबल नहीं मिलता, शव नहीं उठाएंगे।
*2 घंटे चली वार्ता भी बेनतीजा*
मामले की गंभीरता देखते हुए संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा और कलेक्टर निशांत जैन ने आंदोलनकारियों से 2 घंटे बात की। नोखा विधायक सुशीला डूडी, पूर्व मंत्री डॉ.बी.डी. कल्ला समेत कांग्रेस नेताओं ने मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को संविदा नौकरी और दोषियों पर कार्रवाई की 10 सूत्री मांग रखी लेकिन प्रशासन मुख्य मांगों पर सहमत नहीं हुआ तो वार्ता विफल रही।
*आरोप क्या लगे*
कांग्रेसी नेता एडवोकेट सीताराम नायक ने आरोप लगाया कि या तो सिजेरियन में दी गई दवाएं नकली/घटिया थीं, या OT से ICU तक कोई घातक बैक्टीरियल संक्रमण फैला है, जिससे प्रसूताओं की किडनियां फेल हो रही हैं। अभी परिजन अपनी मांगों पर अड़े हैं और धरना जारी है।