राजनौता (राहुल शर्मा): सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजनौता में स्वास्थ्य विभाग के 24×7 इमरजेंसी सेवा के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामवासियों का आरोप है कि सीएचसी पर दोपहर 2 बजे बाद ताला लगा दिया जाता है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
*‘गंभीर मरीज को नहीं मिलता तुरंत इलाज’*
ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर बाद यदि गांव में कोई एक्सीडेंट हो जाए, प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए या अन्य गंभीर स्थिति बन जाए तो अस्पताल बंद मिलने से मरीज को 15-20 किमी दूर कोटपूतली या बहरोड़ भागना पड़ता है। कई बार देरी के कारण मरीज की हालत बिगड़ जाती है।
*गाइड लाइन के खिलाफ है व्यवस्था*
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार सीएचसी स्तर पर 24 घंटे इमरजेंसी, प्रसव और प्राथमिक उपचार की सुविधा अनिवार्य है। इसके बावजूद राजनौता सीएचसी में दोपहर बाद ओपीडी बंद कर ताला लगा दिया जाता है। रात के समय अस्पताल परिसर में कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं रहता।
*डॉक्टर-स्टाफ बढ़ाने की मांग*
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग से सीएचसी में डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त नियुक्ति कर 24×7 स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।