बीकानेर (मुकेश रामावत): देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद बीकानेर के क्रांतिवीर भामाशाह अमरचन्द बाँठिया के बलिदान दिवस 22 जून को सांय 5.30 बजे एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन उनकी मूर्ति स्थल डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मारक स्थल, मेडिकल चौराहा, बीकानेर में रखा गया है। ऐसा शहीद अमरचन्द बाँठिया स्मृति प्रन्यास के अध्यक्ष सुमति लाल बाँठिया ने बताया। सभा के मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ.मनमोहन सिंह यादव होंगे, जो मनमोहन सिंह यादव मेमोरियल कॉलेज, उदयरामसर के डीन है व पूर्व में सहायक रजिस्ट्रार, राजस्थान सरकार के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके है। समारोह की अध्यक्षता डॉ.धर्मचन्द जैन करेंगे, जो पूर्व में श्रीडूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में उपाचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके है। ज्ञातव्य है कि अमर चन्द बाँठिया 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपना बलिदान दे चुके है। जब अंग्रेजों ने ग्वालियर, झांसी व बिठूर राज्य पर कब्जा कर लिया था तो झांसी की रानी लक्ष्मी बाई व तांत्या टोपे ने ग्वालियर राजमाता बैजाबाई ने मिलकर ग्वालियर को अंग्रेजों से मुक्त करवाने हेतु आक्रमण किया और ग्वालियर पर पुनः कब्जा जमा लिया। लड़ाई लम्बी चली, इसमें झांसी की रानी का सारा धन समाप्त हो गया और सैनिकों के राशन व तनखा देने के भी पैसे नहीं बचे तो अमर चन्द बाँठिया जो ग्वालियर के खजान्ची थे। उन्होनें पहले अपना पूरा धन दिया और बाद में ग्वालियर का खजाना भी झांसी की रानी के लिए खोल दिया, जिससे सेना पुनः तैयार हो गई। जब अंग्रेजो को पता चला तो उन्होनें अमरचन्द बाँठिया को गिरफ्तार कर लिया और जेल में बंद कर बहुत यातनाएं दी और माफी मांगने को कहा, जिससे उन्होने साफ इन्कार कर दिया तो बोले आपके 8 साल के पोते को तोप से उड़ा देंगे और 21 जून को पोते लक्ष्मीचंद को तोप के गोले से उनके सामने उड़ा दिया फिर भी उन्होंने माफी नहीं मांगी तो 22 जून 1858 को लश्कर ग्वालियर में अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर लटका दिया और वे देश के लिए शहीद हो गए। ऐसे थे बीकानेर निवासी ग्वालियर सिंधिया घराने के खजान्ची अमरचन्द बाँठिया। उनकी यशोगाथा युगों युगों तक गाई जायेगी।
शहीद अमरचन्द बाँठिया की श्रद्धांजलि सभा 22 जून, सोमवार को, होगा आयोजन
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June 20, 2026
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