रानीवाड़ा/जालौर (महेंद्र देवासी): अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के आह्वान पर गुरुवार को जिला मुख्यालय पर 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया गया। महासंघ के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष हरिकिशन चौधरी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में शिक्षकों ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की रक्षा के लिए विधायी हस्तक्षेप की मांग की।
जिला मंत्री धर्मदान चारण ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी अधिसूचना तथा 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों में असुरक्षा और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि इससे लाखों शिक्षकों के सेवा हित प्रभावित होने की आशंका है। संभाग संयुक्त मंत्री दीपसिंह देवल ने कहा कि महासंघ लंबे समय से शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए कार्य कर रहा है। प्रदेश संयोजक समर्थ भारत मुकेश कुमार जोशी ने बताया कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों का चयन उस समय लागू नियमों के अनुसार हुआ था, इसलिए बाद में लागू पात्रता शर्तों को उन पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है। विभाग संगठन मंत्री नरेंद्र कुमार बोहरा ने मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए तथा उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए। आवश्यकता पड़ने पर संसद में विधायी संशोधन कर इस वर्ग को राहत प्रदान की जाए। प्रदेश संयोजक प्रभावी प्रार्थना सभा संदीप जोशी ने कहा कि संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। जिला अध्यक्ष हीरसिंह राठौड़ ने कहा कि यह आंदोलन केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। जिला संगठन मंत्री शांतिलाल दवे ने कहा कि किसी भी नए नियम या पात्रता मानदंड को पूर्व में विधिवत नियुक्त कर्मचारियों पर लागू करना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। प्रदर्शन में जिला सभाध्यक्ष साँवलाराम चौधरी, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोवनाराम चौधरी, जिला सह संगठन मंत्री मालाराम चौधरी, भभूताराम चौधरी, दिलीप दवे, महेंद्र कुमार चौधरी, अमरदान चारण, पृथ्वीराज चौधरी, कपूरसिंह राजपुरोहित, सीता ओड, नाथाराम, बहादुर सिंह, कैलाश बाबू सेन, महेश चौधरी, विक्रमसिंह, नंदलाल दवे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं संगठन पदाधिकारी उपस्थित रहे।