पावटा (राहुल शर्मा): तेजी से विकास की ओर बढ़ने का दम भरने वाला पावटा कस्बा एक समस्या से पिछले 12 साल से जूझ रहा है, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिले हैं। यह समस्या है पावटा का कस्बे के मुख्य अंडरपास। हल्की सी बारिश होते ही यह अंडरपास तालाब बन जाता है और आमजन का निकलना दूभर हो जाता है।
*पानी में तैरते नेता के पोस्टर, डूबती जनता*
*वीडियो सौशल मिडिया पर जमकर वायरल*
साफ दिख रहा है कि अंडरपास में घुटनों तक गंदा पानी भरा है। इसी पानी में बच्चे स्कूल बैग लेकर, महिलाएं साड़ी समेटकर और बुजुर्ग लाठी टेककर निकलने को मजबूर हैं। बाइक सवार गिरते-पड़ते बाहर निकल रहे हैं। वहीं अंडरपास की दीवारों पर चिपके नेताओं के मुस्कुराते पोस्टर पानी में तैरते नजर आते हैं। सवाल उठता है कि जब नेता और अधिकारी खुद इस रास्ते से नहीं गुजरते, तो जनता का दर्द कैसे समझेंगे।
*‘स्थायी समाधान कब, पूछ रही पावटा की जनता*
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चुनाव में अंडरपास की समस्या को मुद्दा बनाया जाता है। नेता वादे करते हैं, अधिकारी सर्वे कराते हैं, फाइलें दौड़ती हैं लेकिन समाधान शून्य है। 12 साल में कई सरकारें बदलीं, विधायक बदले, अफसर बदले, पर अंडरपास की तस्वीर नहीं बदली। लोगों ने बताया कि “विकास के चार चांद लगाने की बात होती है, लेकिन यहां तो हर बारिश में हम कीचड़ में चांद-तारे देखने लगते हैं। बच्चों का स्कूल छूट जाता है, बीमार को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है।”
*निकासी की व्यवस्था फेल, जिम्मेदार कौन*
जानकार बताते हैं कि अंडरपास में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम या तो है नहीं, या पूरी तरह चोक है। नालियों की सफाई सिर्फ कागजों में होती है और नगर पालिका एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
*जनता का सवाल: सिर्फ योजनाएं नहीं, समाधान भी चाहिए*
लोगों का कहना है कि विकास का मतलब सिर्फ नई योजनाओं के शिलान्यास नहीं है। विकास का मतलब है रोजमर्रा की समस्याओं का स्थायी समाधान। पावटा की जनता पूछ रही है कि आखिर अंडरपास का स्थायी समाधान कब आएगा, क्या अगले आने वाले साल भी ऐसे ही निकल जाएंगे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अब जवाब देना होगा कि आखिर कब तक पावटा की जनता इस ‘मानव निर्मित तालाब’ में तैरने को मजबूर रहेगी।