बीकानेर (मुकेश रामावत): पीबीएम सुधारो जनआंदोलन के तहत सातवें दिन जिला महिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष शशिकला राठौड़ व देहात अध्यक्ष शान्ति बेनिवाल के नेतृत्व में पीबीएम अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने धरना प्रदर्शन किया गया। पीबीएम सुधारो जनआंदोलन के तहत आंदोलनकारी महिलाओं ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं, चिकित्सकीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की मांग की।
राठौड़ एवं बेनिवाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रसूताओं की डिलीवरी के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से छह महिलाओं की किडनी खराब होने का मामला अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। उनका आरोप है कि इस घटना ने अस्पताल में उपचार व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पीबीएम अस्पताल में मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, चिकित्सकीय लापरवाही के कारण अनेक मरीजों की मौत हो चुकी हैं तथा अस्पताल प्रशासन विभिन्न समस्याओं के समाधान में विफल साबित हुआ है। उन्होंने राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खिंवसर द्वारा प्रसूताओं के प्रति अशोभनीय बयान की भी कड़े शब्दों में निन्दा की। देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग व शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, पारदर्शी व्यवस्था और जनहित के लिए है। उन्होंने कहा कि जनता को गुणवत्तापूर्ण एवं जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। साथ ही पीबीएम अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग भी की। सरकार व प्रशासन के सामने 10 मांगे रखी गई है और उनके समाधान हेतु चेतावनी दी हैं कि समय रहते उपरोक्त 10 सूत्री समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो निकट समय में जनआंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
* सीएम मूंधड़ा मेडिसिन विंग को तत्काल शुरू किया जाए।
* वर्षों से तैयार जनाना (गायनिक) विंग का शीघ्र संचालन प्रारंभ किया जाए।
* पीबीएम अस्पताल में हुए भ्रष्टाचार की जांच अस्पताल प्रशासन से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा अधिकारी से करवाई जाए।
* अस्पताल की संपूर्ण सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कर स्वच्छ एवं संक्रमण मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
* सभी आवश्यक दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
* सभी प्रकार की जांचों (टेस्ट, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि) की समय पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
* प्रशासनिक लापरवाही के कारण बंद पड़े सभी चिकित्सा उपकरणों को तत्काल चालू किया जाए।
* ड्यूटी समय में सभी चिकित्सकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
* चिकित्सकीय लापरवाही से प्रभावित उन प्रसूता महिलाओं को, जिनकी किडनी खराब हुई है, 25 लाख का मुआवजा दिया जाए।
* मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, अभद्रता एवं मारपीट की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए।