झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): झड़ाया बालाजी धाम में आयोजित 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के सातवें दिन मंगलवार को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। महायज्ञ में आहुति देने के लिए राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े विशेष रूप से झड़ाया धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा यज्ञ में विश्व कल्याण के लिए आहुति अर्पित की। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे झड़ाया बालाजी धाम पहुंचे। आगमन पर महायज्ञ सेवा समिति एवं संत-महात्माओं द्वारा उनका स्वागत किया गया। राज्यपाल सबसे पहले बालाजी मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा बालाजी महाराज को चोला अर्पित किया। वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चारण के बीच पूजा संपन्न करवाई। इसके बाद राज्यपाल यज्ञशाला पहुंचे, जहां चल रहे 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ में उन्होंने आहुति देकर विश्व शांति, जनकल्याण एवं पर्यावरण शुद्धि की कामना की। यज्ञशाला में वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
*भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण का संदेश*
यज्ञ के पश्चात राज्यपाल कथा पांडाल पहुंचे, जहां प्रदेश के जलदाय मंत्री केएल चौधरी, खंडेला विधायक सुभाष मील, उदयपुरवाटी के पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी व महायज्ञ समिति के पदाधिकारियों ने दुपट्टा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया। अपने संबोधन में राज्यपाल बागड़े ने कहा कि 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ का मूल उद्देश्य विश्व शांति, जनकल्याण और पर्यावरण संरक्षण है। यज्ञ की प्रत्येक आहुति लोकमंगल और मानवता के कल्याण की भावना से समर्पित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कार हमारी पहचान हैं तथा इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। महायज्ञ जैसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।
*रामायण-महाभारत को बताया विश्व की अमूल्य धरोहर*
राज्यपाल बागड़े ने अपने उद्बोधन में रामायण और महाभारत को विश्व के महानतम ग्रंथ बताते हुए भारतीय संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गीता प्रेस के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान को स्वीकार करने के बजाय समाज सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने आमजन से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने महर्षि पतंजलि द्वारा लगभग 2200 वर्ष पूर्व प्रतिपादित योग दर्शन का भी उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है।
*भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान*
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपना संपूर्ण जीवन समाज और लोककल्याण के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि “दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना न्याय है, जबकि केवल अपने अधिकारों की रक्षा करना स्वार्थ है।” श्रीराम ने कभी स्वयं के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि सदैव समाज और मानवता के हित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आग्रह किया तथा राजस्थान में अच्छी वर्षा की कामना करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है और इस वर्ष भी समृद्ध वर्षा की उम्मीद है।
*हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे महायज्ञ में*
कार्यक्रम के अंत में महायज्ञ सेवा समिति के अध्यक्ष मदनलाल भावरिया ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की। उल्लेखनीय है कि झड़ाया बालाजी धाम में 17 जून से प्रारंभ हुआ 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ 25 जून तक चलेगा। महायज्ञ में प्रतिदिन आसपास के क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, कथा एवं भक्ति कार्यक्रमों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। इस अवसर पर जलदाय मंत्री केएल चौधरी, खंडेला विधायक सुभाष मील, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, महामंडलेश्वर बलदेव दास महाराज, सीताराम दास महाराज सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में झुंझुनूं जिला कलेक्टर डॉ.अरुण कुमार गर्ग, सीकर जिला कलेक्टर आशीष मोदी, झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सागर तथा सीकर पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।