निवाई (लालचंद माली): वनस्थली विद्यापीठ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा पाँच दिवसीय संकाय विकास एवं प्रशिक्षण योग प्रज्ञा व कर्मशक्ति के चौथे दिन रि-अलाइन थीम का आयोजन किया गया। सत्र की शुरुआत योग प्रशिक्षक सुश्री विनीता द्वारा स्थूल व्यायाम एवं रेखागति अभ्यास के साथ किया गया। जिसके माध्यम से प्रतिभागियों ने शरीर की स्थिति, संतुलन और समन्वय पर कार्य किया। इसके पश्चात इंजन दौड़ कराई गई, जिससे शरीर में ऊर्जा और सक्रियता का संचार हुआ। इसी प्रकार उत्कटासन, अश्वसंचालनासन, मर्कटासन, सेतुबंधासन, सरल भुजंगासन व फलकासन का अभ्यास कराया गया। इन आसनों के माध्यम से शक्ति, लचीलापन व संतुलन को विकसित करने की जानकारी दी। सत्र का मुख्य उद्देश्य सही शारीरिक संरेखण के प्रति जागरूकता बढ़ाना व योगाभ्यास को अधिक सुरक्षित व प्रभावी बनाना रहा। कर्मशक्ति कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विश्वविख्यात ध्यान प्रशिक्षक प्रो.श्रुति शास्त्री ने ध्यान द्वारा होने वाली आंतरिक सफाई पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नकारात्मक भावनाएँ जैसे क्रोध, चिंता, भय, ईर्ष्या व तनाव हमारे मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं, जो समय के साथ हमारे व्यवहार, सोच और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। नियमित ध्यान से इन प्रभावों की शुद्धि होती है, मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, भावनात्मक संतुलन व बेहतर नींद प्राप्त होती है। इस अवसर पर विद्यापीठ के कुलपति ईना आदित्य शास्त्री व सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निदेशक प्रो.अंशुमन शास्त्री ने प्रतिभागियों को योग और ध्यान को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नियमित योग व ध्यान शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के साथ कार्यक्षमता, एकाग्रता और जीवन संतुलन को भी सशक्त बनाते हैं।
नियमित योग से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य होता है सुदृढ़: ईना आदित्य शास्त्री
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May 04, 2026
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