पाटोदिया परिवार द्वारा आयोजित 'श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ' में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

AYUSH ANTIMA
By -
0


झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): आध्यात्मिक नगरी झुंझुनूं में इन दिनों भक्ति की बयार बह रही है। स्मृतिशेष श्रीमती सुवादेवी एवं श्री डूंगरमल जी पाटोदिया की पावन स्मृति में आयोजित सात दिवसीय 'श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ' का पंचम दिन शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के अद्भुत मेल के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं, कथा के दौरान इन्द्रदेव की मेहरबानी भी रही, जिससे भक्तों में और अधिक उत्साह देखा गया।

* कथा व्यास के ओजस्वी प्रवचन, कृष्ण लीलाओं का मर्म: प्रख्यात कथा व्यास श्री दुर्गादत्त जी व्यास (बीकानेर) ने श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध की कथा का विस्तार करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मात्र घटनाएं नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर के करीब ले जाने वाले विविध सोपान हैं। उन्होंने कृष्ण लीलाओं का अत्यंत रोचक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
* बाल लीला (वात्सल्य और सामर्थ्य): माखन चोरी जैसी बाल लीलाएं ईश्वर के सुलभ और मधुर स्वरूप को दर्शाती हैं, तो वहीं गोवर्धन धारण और असुरों का संहार उनके सर्वशक्तिमान होने का प्रमाण हैं। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं।
* रास लीला (जीव-ब्रह्म का मिलन): यह लौकिक प्रेम से परे जीवात्मा के परमात्मा में विलीन होने की दिव्य अवस्था है। यह अहंकार त्यागकर ईश्वर के प्रति 'अनन्य भक्ति' का सर्वोच्च प्रतीक है।
* भ्रमर गीत (प्रेम बनाम ज्ञान): यह प्रसंग शुष्क ज्ञान और तर्क पर 'प्रेम' की विजय को चरितार्थ करता है। गोपियों का निश्छल प्रेम उद्धव के ज्ञान-अहंकार को परास्त कर यह सिद्ध करता है कि ईश्वर पांडित्य से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और व्याकुलता से प्राप्त होते हैं।
इस पुनीत आयोजन को भव्य रूप देने में श्रीमती सुशीला देवी एवं जुगलकिशोर पाटोदिया के मार्गदर्शन में संपूर्ण पाटोदिया परिवार तन-मन-धन से समर्पित है। इस सेवा कार्य में निम्नलिखित सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा है।
आयोजन में किशोरी टिबड़ा, सुरेश मोदी, रवि रुंगटा मंड्रेला, विशाल ढेड़िया, विकास ढेड़िया, हरीश जगनानी, अनिल सैनी, मनोज तुलस्यान, नरेंद्र मोदी, संदीप ढेडिया, राजेश ढेडिया एवं प्रमोद खण्डेलिया सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने उपस्थित होकर कथा का रसपान किया और पुण्य लाभ अर्जित किया।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!