शबरी के जूठे बेरों में झलकी भक्ति की पराकाष्ठा

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शहर के चुना चौक स्थित रामलीला मैदान, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं पुरोहितों की बगीची के सामने रानी सती रोड पर आयोजित भव्य रामकथा में शुक्रवार को भक्ति, करुणा और प्रभु प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का श्रवण कर भावविभोर हो उठे। कथा संयोजक महेश बसावतिया ने बताया कि रामकथा में केवट, शबरी एवं सुग्रीव जैसे रामायण के प्रमुख पात्रों के माध्यम से प्रभु श्रीराम की करुणा, भक्तवत्सलता और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का मार्मिक वर्णन किया जा रहा है। कथा के दौरान पूरा पांडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। कथावाचक धर्मदास महाराज ने शबरी भक्ति प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान केवल प्रेम और सच्ची भक्ति के भूखे होते हैं, बाहरी आडंबर के नहीं। महाराज ने बताया कि शबरी, जो मतंग मुनि की परम शिष्या थीं, वर्षों तक प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा करती रहीं। जब भगवान राम और लक्ष्मण उनकी कुटिया पहुंचे तो शबरी प्रेमवश बेरों को चख-चखकर प्रभु को खिलाने लगीं। भगवान श्रीराम ने भी भक्त के निष्कलंक प्रेम को स्वीकार करते हुए उन बेरों को बड़े प्रेम से ग्रहण किया।धर्मदास महाराज ने आगे नवधा भक्ति का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने शबरी को भक्ति के नौ स्वरूपों का उपदेश देकर उसे मोक्ष प्रदान किया। इसके पश्चात महाराज ने हनुमान मिलन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हनुमानजी ब्राह्मण वेश धारण कर प्रभु श्रीराम से मिले और उन्हें सुग्रीव के पास लेकर गए, जहां अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की मित्रता संपन्न हुई। रामकथा के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिली। मंच पर डॉक्टर डीएन तुलस्यान, शिवचरण पुरोहित, वशिष्ठ शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, गोपीराम पुरोहित, डॉ.भावना शर्मा एवं कमलेश मिश्रा का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर अनिता सैनी, संगीता आर्य, गायत्री शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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