वेस्ट एशिया संकट पर बोले विशेषज्ञ — बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी में “वेस्ट एशिया संकट – भारत के लिए बाहरी एवं आंतरिक सुरक्षा चिंताएं” विषय पर विशेष व्याख्यान एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी श्री सोमेश गोयल उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में गल्फ देशों के कई प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व कर चुके एवं भारतीय विश्व मामलों की परिषद, नई दिल्ली के वरिष्ठ शोध फेलो डॉ.एफ.आर. सिद्दीकी तथा आरपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, चिड़ावा की चेयरपर्सन श्रीमती निकिता थालौर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ.मनोज कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण, तिलक, सरस्वती पूजन एवं कुलगीत के साथ हुई। स्वागत भाषण में कैंपस डायरेक्टर प्रोफेसर पीएस जस्सल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के समसामयिक विषयों पर चर्चा आयोजित करना तथा ऐसे बुद्धिजीवियों की उपस्थिति संस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास एवं जागरूकता को नई दिशा देते हैं। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता सोमेश गोयल ने कहा कि भारत की कूटनीति “मौन ही स्वर्ण है” की नीति पर आगे बढ़ रही है। भारत ने गल्फ देशों, अफ्रीकी देशों तथा एशियाई राष्ट्रों के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए हैं और इसी कारण आज भारत कई देशों के लिए एक मजबूत सहयोगी एवं संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार युद्ध चुनौतियों के साथ अवसर भी लेकर आता है और भारत को अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ.एफआर सिद्दीकी ने कहा कि वेस्ट एशिया संकट कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से विकसित होती स्थिति का परिणाम है, जो आज बेहद गंभीर रूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आज की बदलती दुनिया में भारत को अपनी कूटनीतिक चुनौतियों, वेस्ट एशिया में बसे भारतीयों की सुरक्षा तथा व्यापारिक हितों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि कई बड़ी शक्तियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संघर्ष में शामिल हैं।
इस अवसर पर श्रीमती निकिता थालौर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के संस्थापक डीसी सिंघानिया ने लंदन जैसे बड़े शहर में सफल होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने का सपना देखा, जो उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया संकट का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर भी पड़ रहा है। गैस और पेट्रोल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक एकता बनाए रखने एवं आंतरिक अराजकता से दूर रहने का आह्वान किया। अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ.मनोज कुमार ने कहा कि सिंघानिया विश्वविद्यालय समय-समय पर नए वैश्विक परिदृश्यों एवं समसामयिक विषयों पर चर्चा सत्र आयोजित कर रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व नेपाल-भारत संबंधों पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया था और अब वेस्ट एशिया संकट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल आसपास ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर हो रही घटनाओं के प्रति भी जागरूक बना रहा है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार एवं सजग नागरिक बन सकें। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भी वेस्ट एशिया संकट, भारत की विदेश नीति, सुरक्षा चुनौतियों तथा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका अतिथियों द्वारा विस्तार से उत्तर दिया गया। मंच का कुशल संचालन कुलसचिव मोहम्मद इमरान हाशमी ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और ग्रुप फोटो के साथ हुआ। इस अवसर पर अन्य अतिथियों के रूप में डॉ.अब्दुल राशिद हाशमी, प्रेस सूचना ब्यूरो के प्रतिनिधि, ऑनरेरी डीन डॉ.रामनिवास मानव सहित विश्वविद्यालय का स्टाफ एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

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