झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): पाटोदिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दौरान कथा के छठे दिन 30 मई, शनिवार को रुक्मिणी-कृष्ण विवाह के प्रसंग ने भक्तों को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। पंडाल का वातावरण कृष्णमय हो उठा, जहाँ हर भक्त प्रभु की भक्ति में लीन दिखाई दिया। प्रख्यात कथा व्यास श्री दुर्गादत्त जी व्यास (बीकानेर) ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि विदर्भ राजपुत्री रुक्मिणी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम केवल एक मानवीय भावना नहीं, बल्कि 'पूर्ण समर्पण' का जीवंत उदाहरण है। कथा व्यास ने मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि किस प्रकार माता रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से प्रभु को पत्र लिखकर अपनी पुकार उन तक पहुँचाई। प्रभु ने भी अपने भक्त की पुकार सुनते ही द्वारका से प्रस्थान किया और धर्मपूर्वक रुक्मिणी का वरण कर अटूट विश्वास को सिद्ध किया। कथा के अगले चरण में महाराज जी ने 'द्वारकापुरी' की अद्भुत भव्यता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जरासंध के आतंक से प्रजा को मुक्त करने हेतु श्रीकृष्ण द्वारा समुद्र के मध्य निर्मित द्वारका केवल एक नगर नहीं, अपितु स्वर्ण और रत्नों से सुसज्जित एक ऐसी नगरी थी जहाँ अधर्म का कोई स्थान नहीं था। व्यास जी ने आह्वान किया कि जो भक्त सच्चे मन से 'द्वारकाधीश' का स्मरण करता है, प्रभु उसके जीवन के समस्त संकटों को हर लेते हैं। विवाह प्रसंग के चरम पर पहुँचते ही पूरा पंडाल 'राधा कृष्ण जय' के उद्घोष से गूँज उठा। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की जीवंत झांकी सजाई गई, इस अवसर पर भक्तों ने भजनों की सुरीली धुनों पर नृत्य किया और श्रद्धा स्वरूप जमकर पुष्प वर्षा की गई। यह दृश्य ऐसा था मानो साक्षात द्वारका का वैभव पंडाल में उतर आया हो। इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में पाटोदिया परिवार ने 'नर सेवा-नारायण सेवा' का भाव जागृत किया है। श्रीमती सुशीला देवी एवं श्री जुगलकिशोर पाटोदिया के मार्गदर्शन में पूरा परिवार इस यज्ञ में समर्पित भाव से जुटा है।कथा कार्यक्रम में रामचन्द्र शर्मा पाटोदा, सुरेश मोदी, रतन शर्मा, विशाल ढेड़िया, विकास ढेड़िया, हरी जगनानी, नरेंद्र मोदी, अनिल सैनी, विपुल हलवाई, संदीप ढेड़िया एवं अभिषेक मुरारका सहित अन्य गणमान्य जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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