मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग पर गहन जागरूकता अभियान व असंस्थागत प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): कृषि विज्ञान केंद्र केशवना द्वारा किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करने तथा उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग कर उत्पादन लागत में कमी लाकर किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को कोराना (आहोर) ग्राम में “मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग के लाभ” विषय पर एक गहन जागरूकता अभियान एवं असंस्थागत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में शस्य वैज्ञानिक बिरम सिंह गुर्जर ने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग के लाभ, हरी खाद, फसल चक्र तथा टिकाऊ खेती के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण से भूमि की उर्वरक क्षमता का सही आकलन होता है और उसी अनुसार उर्वरक डालने से फसल की पैदावार एवं गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थय सुधार एवं उर्वरक बचत के लिए ढेंचा, सनई जैसी हरी खाद फसलों को खेतों में लगाने पर विशेष बल दिया। 
उद्यान विशेषज्ञ डॉ.पवन कुमार पारीक ने मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सब्जी फसलों में उर्वरकों की संतुलित मात्रा के प्रयोग तथा इससे लागत में कमी लाने के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे डीएपी एवं यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचें तथा संतुलित उर्वरकों का ही प्रयोग करें। कार्यक्रम में 6 महिला कृषक एवं 32 पुरुष कृषक सहित 38 कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही।

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