वनकर्मियों की मौजूदगी मे ‘अवैध खनन का खेल’, चिरमी डूंगरी में रातभर गूंजती मशीने जिम्मेदार खामोश क्यों*

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): रेंज के सिरस नाका स्थित नोहटा वन चौकी के आधा दर्जन वनकर्मियों की मौजूदगी मे ठीक उनके सामने चिरमी डूंगरी दर्रा क्षेत्र में कथित अवैध खनन और पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर वन विभाग की चौकी मौजूद है, उसी के आसपास खनन गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई, जबकि विधायक रामसहाय वर्मा ने भ्रष्टाचार को लेकर जिला कलेक्टर टीना डाबी को खंडवा मे आयोजित रात्रि चौपाल कार्यक्रम मे सभी विभागों मे भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की बात कही थी। जिस पर पीपलू बिजली विभाग के 3-4 कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही हुई। जबकि निवाई पंचायत समिति विकास अधिकारी नंदकिशोर शर्मा, डांगरथल ग्राम विकास अधिकारी राजन्ती बैरवा, सरपंच बजरंग लाल बैरवा सहित कई कार्मिकों के खिलाफ तो कार्यवाही शुरू हो गई लेकिन वन विभाग, पंचायत समिति, पीड़बल्यूड़ी, राजस्व विभाग, नगर पालिका, चिकित्सा सहित कई विभागों की चर्चाएं तो खूब हो रही है, लेकिन कार्यवाही कब होंगी ये भविष्य के गर्भ मे है।ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में देर रात तक जेसीबी, डंपर और अन्य भारी मशीनें चलती हैं। पहाड़ियों में खुदाई कर सफेद पत्थर निकाले जाते हैं और वाहनों के जरिए बाहर भेजे जाते हैं। सवाल यह उठता है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही।
*“रात में चलता है खेल, दिन में सन्नाटा”*
स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंधेरा होते ही खनन गतिविधियां तेज हो जाती हैं। मशीनों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा रहता है। इससे यह धारणा बन रही है कि या तो निगरानी बेहद कमजोर है या फिर कोई बड़ा खेल चल रहा है।
*हरे पेड़ों पर भी आरी, पर्यावरण पर वार*
खनन के साथ-साथ प्लांटेशन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की शिकायतें भी सामने आई हैं। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ अवैध गतिविधि नहीं बल्कि पर्यावरण पर सीधा हमला है। पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों का बसेरा उजड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
*चेकडैम क्षेत्र भी नहीं बचा*
ग्रामीणों का कहना है कि नोहटा प्रथम क्षेत्र के चेकडैम नंबर-04 के आसपास भी खुदाई के निशान देखे गए हैं। अगर जल संरचनाओं के पास भी खनन हो रहा है, तो यह आने वाले समय में जल संकट और भू-क्षरण जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
*“चौकी के सामने सब कुछ, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं”*
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वन चौकी इतनी नजदीक है, तो इन गतिविधियों पर रोक क्यों नहीं लग पा रही। क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामी है—यह जांच का विषय बन गया है।
*ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी*
लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने साफ कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।
*अब निगाहें प्रशासन पर*
पूरा मामला अब प्रशासन की साख से भी जुड़ गया है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

*इनका कहना*

वनकर्मी पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहे है, खनन माफिया रात मे चोरी छिपे अवैध खनन करते है। नोहट्टा नाके पर पांच कर्मचारी तैनात है। मोहन लाल को टोंक लगाकर मुझे आज ही बड़ागांव से वेकल्पिक प्रभार सौंपा गया है। 
*रामराज मीना*
नाका प्रभारी नोहट्टा, निवाई टोंक।

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