जमीन के 'महाफर्जीवाड़े' में तहसीलदार, पटवारी और बाबू पर केस दर्ज, करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल उजागर

AYUSH ANTIMA
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​निवाई/टोंक (लालचंद माली): राजस्थान के निवाई क्षेत्र में सरकारी तंत्र की मिलीभगत से करोड़ों की बेशकीमती जमीन हड़पने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) न्यायालय के कड़े आदेश के बाद निवाई पुलिस ने तहसीलदार, पटवारी और रजिस्ट्री कार्यालय के बाबू सहित कुल सात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
*कैसे हुआ करोड़ों का 'खेल'* 
मामला जमीन की रजिस्ट्री में की गई "कूटरचना" (दस्तावेजों में हेराफेरी) से जुड़ा है। 

*जानकारी के अनुसार क्या था ​सौदा*

प्रार्थियों ने अपनी खसरा संख्या 2914 की मात्र 22 बिस्वा जमीन का सौदा 2 लाख रुपये में रामावतार और गोपाल सैनी के साथ किया था।

*​फर्जीवाड़ा क्या हुआ*

आरोप है कि तहसीलदार नरेश गुर्जर, यूडीसी दिनेश जाट और खरीदारों ने मिलीभगत कर रजिस्ट्री के पेज नंबर 2 पर अतिरिक्त 7 खसरा नंबर (2619, 2903, 2905, 2909, 2911, 2913, 2899) जोड़ दिए।
*​नतीजा*

सिर्फ 22 बिस्वा की जगह कुल 1.4797 हेक्टेयर जमीन का पैरा जोड़कर उस पर फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए गए।
*​चौंकाने वाला तथ्य*

जिस जमीन को इस फर्जीवाड़े के जरिए हड़पा गया, उसकी सरकारी DLC रेट करीब 57 लाख 41 हजार 114 रुपये है।
*​अदालत का डंडा: इन पर गिरी गाज*
​न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 'पदों का दुरुपयोग' और 'जघन्य विश्वासघात' माना है। 
पुलिस ने इस्तगासे के आधार पर इन लोगों को नामजद किया है: ​नरेश गुर्जर (तहसीलदार एवं उप-पंजीयक), ​जीतराम चौधरी (कस्बा पटवारी) ​दिनेश जाट (यूडीसी, उप-पंजीयक कार्यालय) ​रामावतार व गोपाल सैनी (जमीन खरीदार)
​अजयराज व जगदीश सैनी (गवाह)
*​DSP करेंगे मामले की जांच, न्यायालय ने मांगी रिपोर्ट*
​इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच का जिम्मा पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रवि प्रकाश शर्मा को सौंपा गया है। न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि दस्तावेजों की गहनता से तफ्तीश की जाए और जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश की जाए।
​फिलहाल, पुलिस ने रजिस्ट्री रिकॉर्ड और पटवारी द्वारा किए गए फर्जी नामांतरण (म्यूटेशन) के दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने से उपखंड प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

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