रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान में हो रही देरी तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने रविवार को जयपुर में प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र लखारा एवं प्रदेश सभाध्यक्ष सम्पत सिंह कविया के नेतृत्व में आयोजित प्रेस वार्ता में आंदोलन की रूपरेखा जारी की। संगठन के संभाग संयुक्त मंत्री दीपसिंह देवल ने बताया कि नवीन सरकार के गठन के बाद संगठन ने नियमित संवाद और वार्ता के माध्यम से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगों पर निर्णय नहीं होने से शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने बताया कि संगठन की प्रमुख मांगों में शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति, क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति, स्टाफिंग पैटर्न लागू करना, आरजीएचएस योजना को सुचारू रखना, वेतन विसंगतियां दूर करना तथा संविदा शिक्षकों को नियमित करना शामिल है। प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि संगठन द्वारा 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तर तथा 10 जून को जयपुर संभाग स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना एवं मानसून सत्र में विधानसभा घेराव किया जाएगा। जिला मीडिया प्रभारी आसुराम सेन ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी नवाचार के नाम पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग में ऐसा वातावरण बन गया है, जहां निर्णयों पर पुनर्विचार की कोई गुंजाइश नहीं बची है और अधिकारी शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। संघर्ष समिति के संयोजक सम्पत सिंह कविया ने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाशों में कटौती जैसे निर्णय भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत हैं। उन्होंने बताया कि एक ही राज्य में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अलग-अलग अवकाश अवधि निर्धारित है, जबकि माध्यमिक एवं प्रारंभिक विद्यालयों में अवकाश घटाकर 35 दिन कर दिए गए हैं। महासंघ ने पदोन्नति एवं पदस्थापन प्रक्रिया, पीएमश्री विद्यालयों की चयन प्रक्रिया, तृतीय श्रेणी शिक्षकों की समस्याओं तथा गैर शैक्षणिक कार्यों को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों पर लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ाया जा रहा है, जिससे वे विद्यार्थियों और शिक्षण कार्य से दूर हो रहे हैं।
महासंघ के विभाग संगठन मंत्री मुकेश कुमार जोशी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग ने अपनी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया और विसंगतियों को दूर नहीं किया तो संगठन प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन करेगा।